संधि

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नए शब्दों के निर्माण के लिए

संधि से शब्द अर्थ का पता लगता है, वर्णों के मेल को संधि कहते हैं, दो या दो से अधिक वर्णों के मेल से होने वाला विकार संधि कहलाता है

संधि के केवल 4 स्थान होते हैं

सार्थक + सार्थक ( विद्यालय = विद्या + आलय)

उपसर्ग + सार्थक (अति + आचार =अत्याचार)

उपसर्ग + प्रत्यय (अति + ईव = अत्याचार )

सार्थक + प्रत्यय ( श्रद्धा + आलू= श्रद्धालु)

संधि तीन प्रकार की होती है :-

स्वर संधि

व्यंजन संधि

विसर्ग संधि

स्वर संधि

स्वरों का स्वरों से मेल होने पर जो विकार उत्पन्न होता है उसे स्वर संधि करते हैं

स्वर संधि के पांच प्रकार माने जाते हैं

दीर्घ संधि

गुण संधि

वृध्दि संधि

अयादि संधि

यण संधि

Trick :- दी गु व अ य

दी (दीर्घ संधि) गु (गुण संधि) (वृध्दि संधि) (अयादि संधि) (यण संधि)

दीर्घ संधि :-

गुण संधि : –

वृद्धि संधि

अयादि संधि

यण संधि

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