सिंधु घाटी सभ्यता

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सिंधु घाटी सभ्यता

वृक्षवल्लय विधि

  • सिंधु घाटी सभ्यता पर सर्वप्रथम प्रकाश 1826 ईं में चार्ल्स मेसन के द्वारा डाला गया । परंतु कोई भी उत्खन्न नही किया गया
  • सिन्धु घाटी सभ्यता का मुख्य उत्खन्न 1920 से 21 मे माधोस्वरूप वत्स व दयाराम सहानी ने किया था
  • इनके द्वारा हडप्पा नामक टीले का उत्खन्न किया गया था ।
  • सिंधु घाटी सभ्यता से हमे काॅसा व ताम्र धातु के साथ-साथ पत्थर के भी अवशेष प्राप्त हुए है। इस कारण इसे काॅस्ययुगीन संस्कृति भी कहते है।
  • सर्वप्रथम 1921 में हडप्पा सभ्यता का पता चला इसलिये इसे हडप्पा सभ्यता भी कहते है।
  • सिंधु घाटी सभ्यता मातृसतात्मक सभ्यता थी
  • सिंधु घाटी सभ्यता का विस्तार
उत्तर मांडा तक (कष्मीर)
पष्चिम ¬(बलूचिस्तान में सुतकागेंडोर )+पूर्व आलमगीरपुर (उतर प्रदेष)
दक्षिण (दाइमाबाद )महाराष्ट्र
  • सिंधु घाटी सभ्यता से हमे चार प्रकार के मानव अस्ती पंजर प्राप्त हुए है।
  • सिंधु घाटी सभ्यता से हमे भावचित्रात्मक या ब्रेस्टोफेदन प्रकार लिपी प्राप्त हुई है। जो बाए से दाए व दाये से बाए लिखी जाती थी
  • यह लिपी वर्तमान समय में भी पढी नही जाती है।
  • मोहनजादडो से हमे एक तीन मुख वाले पशुपति की मुर्ती प्राप्त हुई है। जिसकी पहचान इतीहासकार मार्शल के द्वारा की गई
  • सिंधुघाटी सभ्यता की प्रमुख फसले जो और गेहु है।
  • सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख पशु कुबडवाला बैल (कुकदमान वृषभ) तथा एक सिंह वाला बैल (एकेश्रम वृषभ)
  • गुजरात के सुरकोल्दा नामक स्थल से हमें घोडे के अस्थिपंजर की जानकारी प्राप्त हुई है। जबकी सिंधु घाटी के लोग घोडे व गाय से अपरिचित थे
  • हरियाणा से बनावली नामंक स्थान से हमे एक अर्धवृताकार डाया प्राप्त हुआ है।
  • जिसकी पहचान सम्भवतःमंदिर के रूप में की गई है।
  • सुधास्थकी वह क्रोस हमे हडप्पा नामक स्थान से प्राप्त हुआ है।

सभ्यता का नामस्थानउत्खन्न कर्तानदीविषेष
हडप्पापाकिस्तान सिंध प्रांतमधोस्वरूप वत्स
दयाराम साहनी (1920 से 21)
रावीप्राप्त अवषेष:- विषाल अन्नागार ,अभिलेख युक्त मोहरे ,काॅसा गलाने का कारखाना,षंक से निर्मित बैल
मोहन जोदडो
(षाब्दिक अर्थ मुद्रो का टिला )
पाकिस्तान सिंध प्रांत राखलदास बनर्जी
(1920)
सिंधु नदी प्राप्त अवषेष:-विषाल स्नानागार ,अन्नागार ,समकाण पर काटती सडके ,कूषाण कालिन बोध्द स्तूप
चन्हूदडो पाकिस्तान सिंध प्रांत एम जी मजूमदारसिंधु नदी सिंधु घाटी सभ्यता को औद्यौगिक नगर भी कहते है ,
मनके बनाने का कारखाना , इसमे कोई दुर्ग नही था
धोलावीराभारत ग्ुाजरातजगपतिजाषी
1967से 68
स्वतंत्र भारत में खोज गया हडप्पा कालीन नगर स्थापत्य कला की दृष्टि से सबसे सुंदर नगर
प्राप्त अवषेष:-जलास्यो का नगर ,सात सांस्कृतिक चरणो के अवषेष, विषाल स्टेडियम
कालिबंगाराजस्थान (हनुमानगड)अमलान्नद घोष , 1951से 53में
बी के थापर तथा बी बी लाल ने 1961 से 69 में
घग्घर नदीकालिबंगाप्राप्त अवषेषः-जूते हुए खेत के साक्ष्य ,अग्नि कुण्ड,अलंकृत ईटे, का ष्षाब्दिक अर्थ है काले रंग की चुडिया ,
लोथलगुजरात (अहमदाबाद)1957में रंगनाथ राव य( एस आर राव )भोगवा नदीइसे सिंधु सभ्यता का व्यापारिक नगर कहा जाता है।
प्राप्त अवषेषः- मनके बनाने का खारखाना ,बंदरगाह की जानकारी
राखीगढीराजस्थान (हरियाणा)रफीक मुगल के नेतृत्व मे उत्खन्नघग्घर नदी भारत का सबसे विस्तृत नगर ,

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