भाग 3
अनुच्छेद 12 से 35
प्रेरणा अमेरिका से
मूल अधिकारों का जनक देश ब्रिटेन को माना जाता है
भारतीय संविधान के भाग 3 को मैग्नाकार्टा कहा जाता है यह विधायिका और कार्यपालिका की सत्य को मर्यादित कहते हैं
संविधान के प्रारंभ में कुल 7 मूल अधिकार थे
अनुच्छेद 14 से 18 समता का अधिकार
अनुच्छेद 19 से 22 स्वतंत्रता का अधिकार
अनुच्छेद 23 से 24 शोषण के विरुद्ध अधिकार
अनुच्छेद 25 से 28 धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार
अनुच्छेद 29 से 30 शिक्षा व संस्कृति संबंधित अधिकार
अनुच्छेद 31 संपत्ति का अधिकार
अनुच्छेद 32 संवैधानिक उपचारों का अधिकार
जनता पार्टी के पीएम मोरारजी देसाई 1978 में 44 वा संविधान संशोधन करवाया जिसके तहत संपत्ति के अधिकार मूल अधिकार की श्रेणी से हटाकर दिया गया है
अनुच्छेद 12 राज्यों को परिभाषित करना
केंद्र सरकार व संसद – लोकसभा व राज्यसभा
राज्य सरकार व विधान मंडल – विधान सभा विधान परिषद
स्थानीय प्राधिकारी – शहरी शासन और ग्रामीण स्वशासन
अन्य प्राधिकारी – बी एस एन एल, एल आई सी , रेलवे बोर्ड ,दिल्ली विकास प्राधिकरण
अनुच्छेद 13 न्यायिक पुनरावलोकन
यदि सरकार हमारे मूल अधिकारों का हनन करती है तो न्यायपालिका न्याय पुनरावलोकन विधि के माध्यम से सरकार को फटकार लगा सकती है
न्यायिक पुनरावलोकन शब्द अमेरिका से लिया गया है
अनुच्छेद 14 में दो प्रकार की समानता है
विधि के समक्ष समानता ब्रिटेन से
विधियों के समान संरक्षण अमेरिका से
अनुच्छेद 15 सामाजिक समानता
जाति , धर्म , लिंग , स्थान ,भाषा आदि के आधार पर भेदभाव पर रोक
अनुच्छेद 16 सरकारी नौकरी के विषय में अवसर की समानता
संविधान के अनुच्छेद 16 1 वर्ष 16 टू में राज्य के अधीन किसी पद या अन्य नियोजन में नियुक्ति के विषय में सभी नागरिकों को समान अवसर प्रदान किया जाएगा
अनुच्छेद 16 तीन के तहत राज्य नौकरियों में निवास के आधार पर निवेश कर सकता आज कुछ रोजगार किसी क्षेत्र के निवासियों के लिए आरक्षित कर सकता है
अनुच्छेद 16 4 राज्य को सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग ओबीसी के लिए विशेष उपबंध करने का अधिकार प्रदान करता है
अनुच्छेद 16 पांच किसी धर्म या संप्रदाय के लोगों को छूट
अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता का अंत
समाज में समानता को और अधिक कठोर बनाने के लिए अनुच्छेद 17 समाज में अस्पृश्यता को समाप्त करके छुआछूत के व्यवहार को दंडनीय अपराध घोषित करता है इस संबंध में संसद ने 1955 में अस्पृश्यता अपराध अधिनियम 1955 पारित किया सितंबर 1976 में संशोधन कर इसे और अधिक कठोर बनाकर दंड उपबन्ध को ज्यादा कठोर कर दिया गया
अनुच्छेद 18 उपाधियों का अंत
भारत का कोई भी नागरिक राष्ट्रपति की आज्ञा के बिना किसी अन्य देश से किसी भी प्रकार की उपाधि स्वीकार नहीं करेगा सेना या अकादमी सम्मान के सिवाय राज्य अन्य किसी भी उपाधि का वादा नहीं करेगा क्योंकि उपाधियों को समाप्त कर दिया गया है
अनुच्छेद 19
प्रारंभ में 7 स्वतंत्रता
वर्तमान में 6 स्वतंत्रता
सभी भारतीय नागरिकों को विविध प्रकार की विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है
अनुच्छेद 19 ए विचार अभिव्यक्ति स्वतंत्रता प्रेस की स्वतंत्रता (मीडिया को भारतीय लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है)
अनुच्छेद 19 बी शांतिपूर्वक सम्मेलन करने की स्वतंत्रता
अनुच्छेद 19 सी संघ पार्टी बनाने की स्वतंत्रता
अनुच्छेद 19 डी किसी भी जगह जाने की स्वतंत्रता
अनुच्छेद 19 ई किसी भी जगह बस जाने की स्वतंत्रता
अनुच्छेद 19 जी जीविकोपार्जन का अधिकार
अनुच्छेद 31 भाग 19 एप्स का संबंध संपत्ति के अधिकार से हैं 44 वें संविधान संशोधन 1978 के तहत संपत्ति के अधिकार को एक कानूनी अधिकार बना दिया गया
अनुच्छेद 20
भारतीय नागरिकों को अपराधों के लिए दोषी सिद्धि के संबंध में संरक्षण प्रदान करता है, एक अपराध के लिए सिर्फ एक बार सजा मिलेगी, अपराधी को केवल तत्कालीन कानूनी उपलब्धि के तहत सजा मिलेगी
किसी भी नागरिक को सर्वे के विरुद्ध न्यायालय में गवाही देने के लिए वादे नहीं किया जाएगा
अनुच्छेद 21 प्राण व दैहिक स्वतंत्रता
अनुच्छेद को जीवन का अधिकार भी कहा जाता है
भारतीय नागरिकों के जीवन एवं शारीरिक स्वतंत्रता का संरक्षण करता है इसके तहत किसी भी भारतीय नागरिक को कानून द्वारा निर्मित प्रक्रिया के अतिरिक्त उसके जीवन और व्यक्तित्व स्वतंत्रता के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता
अनुच्छेद 21 का राज्य 6 से 14 वर्ष के बच्चों को निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराएगा 66 वां संविधान संशोधन 2002
संपूर्ण भारत में शिक्षा का अधिकार 1 अप्रैल 2002 को लागू किया गया
अनुच्छेद 22 कुछ स्थितियों में भारतीय नागरिक की गिरफ्तारी और विरोध में संरक्षण प्रदान करता है
यदि किसी नागरिक को मनमाने तरीके से हिरासत में लिया गया है तो उसे हिरासत में लेने का कारण बताना होगा
हिरासत में लिए गए नागरिक को 24 घंटे के अंदर निश्चित मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा
हिरासत में लिए गए व्यक्ति को अपने पसंद के अधिवक्ता से सलाह लेने का अधिकार होगा
अनुच्छेद 23 बाल श्रम में बंधुआ मजदूरी
अनुच्छेद 24 बाल श्रम निषेध 14 वर्ष से कम आयु वाले किसी बच्चे को कारखानों खनन क्षेत्रों या अन्य किसी भी प्रकार के जोखिम भरे कार्य पर नियुक्त करना दंडनीय अपराध घोषित किया गया है
अनुच्छेद 25 धार्मिक अंतःकरण की स्वतंत्रता
भारतीय नागरिकों को किसी भी धर्म को मानने तथा उसका प्रचार प्रसार करने की स्वतंत्रता प्रदान की गई है
अनुच्छेद 26 भारतीय नागरिकों को अपने धर्म के लिए संस्थाओं की स्थापना करने संचालन करने तथा विधि सम्मत संपत्ति अर्जन करने स्वामित्व करने तथा नियंत्रण का अधिकार देती है
अनुच्छेद 27 धार्मिक कार्य टैक्स की छूट
राज्य किसी भी नागरिक को जिसकी आई किसी भी धर्म या धार्मिक संप्रदाय की प्रकृति में वह के लिए निश्चित कर दी गई है उसे ऐसे कर देने के लिए वादे नहीं किया जाएगा
अनुच्छेद 28 राजकीय शिक्षण संस्थानों धार्मिक शिक्षा का विशेष
राज्य विधि से पूर्ण रूप से संचालित किसी शिक्षण संस्था में कोई धार्मिक शिक्षा नहीं दी जाएगी इस प्रकार का कोई शिक्षण संस्थान अपने विद्यार्थियों को किसी धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेने या किसी धर्म प्रदेश को बलपूर्वक सुनने के लिए वादे नहीं करेगा
अनुच्छेद 29 प्रत्येक वर्ग अपनी भाषा संस्कृति शिक्षा को सुरक्षित करेगा
भारत के नागरिकों को जिनकी अपनी विशेष भाषा लिपि या संस्कृति है उसे बनाए रखने का पूर्ण अधिकार देता है
अनुच्छेद 30 अल्पसंख्यक अपने लिए अलग से शिक्षण संस्थानों का निर्माण करें
अल्पसंख्यक आयोग का गठन 1993 में किया गया इस आयोग का गठन राष्ट्रपति करता है
अनुच्छेद 32 संवैधानिक उपचारों का मूल अधिकार यह मूल अधिकार हमें तुरंत न्याय प्रदान करता है डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने अनुच्छेद 32 वह संवैधानिक उपचार के अधिकार को भारतीय संविधान की आत्मा कहा यदि सरकार हमारे मूल अधिकारों का उल्लंघन करती है तो अनुच्छेद 32 में सुप्रीम कोर्ट में तथा अनुच्छेद 236 में हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सकते हैं
सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट निम्न पांच लेख जारी करते हैं
बंदी प्रत्यक्षीकरण
उत्प्रेषण
अधिकार प्रच्छा
परमादेश
प्रतिषेध