पृथ्वी की गतिया

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पृथ्वी की गतिया

  • पृथ्वी दोे प्रमुख गतियॉ करती है।
  • परिभ्रमण या घूर्णन
  • परिक्रमण

परिभ्रमण गति

  • पृथ्वी का अपने अक्ष पर घूमना परिभ्रमण कहलाता है।
  • अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है।
  • पृथ्वी अपने अक्ष पर 1670 किमी /सैकण्ड की गति से घूमती है।
  • पृथ्वी पर 1670 किमी/सैकण्ड की गति से घूमता है। पृथ्वी का घूर्णन गति का सर्वाधिक प्रभाव भूमध्य रेखा पर होता है।
  • पृथ्वी पर अपकेन्द्रीय बल का प्रभाव भूमध्य रेखा पर अधिक तथा ध्रवो पर कम रहता है। गुरूत्वाकर्षण बल का प्रभाव ध्रवो पर अधिक व भूमध्य रेखा पर कम रहता है।

Note: –
गुरूत्वाकर्षण बल बाहर से अन्दर की ओर कार्य करता है। तथा अपकेन्द्रीय बल अन्दर से बाहर की ओ कार्य करता हैं

  • घूर्णन गति के प्रभाव
  • दिन रात बराबर होते है।
  • दैनिक ज्वार भाटा की उत्पति
  • महासागरिय धाराओ की उत्पति
  • पृथ्वी का गोलाभिय होना
  • सूर्योदय व सूर्यास्त

परिक्रमण गति:-

  • समय 365 दिन 48 मिनट 46 सैकडण का समय लगता है।
  • परिक्रमण गति 107000 किमी /घण्टा या 29.8 किलोमीटर /सैकण्ड का समय लगता है।
  • सूर्य के चारो ओर दीर्घ वृताकार पथ पर चक्कर लगाता है।
  • पृथ्वी केन्द्रीत संकल्पना क्लोडियम टोल्मी ने दी
  • सूर्य सिध्दान्त 2006 में आर्यभ्ट्ट ने दिया ।
  • सूर्य सिध्दान्त संकल्पना निकालस कॉपर निकस ने दी
  • कैपलर ने ग्रहो का दीर्घ वृताकार पथ का सिध्दान्त दिया ।
  • परिक्रमण गति के प्रभाव
  • उपसौर व अपसौर की घटना परिक्रमण गति के कारण ही होती है।
  • सूर्य से पृथ्वी की अधिकत्म दूरी अपसौर 4 जुलाई को तथा न्यूनतम दूरी उपसौर 3 जनवरी को होती है।
  • मौसम परिवर्तन की घटना भी परिक्रमण गति के कारण ही होती है।
  • दिन रात की अवधी मे अन्तर
  • Note:- सौर दिवस 24 घण्टे का नक्षत्र दिवस, 23 घण्टे 56 मिनट 4 सैकण्ड का ।
  • चन्द्रमा:-
  • चन्द्रमा की सतह और उसकी आन्तरिक स्थिति का अध्ययन लेनॉलॉजी कहलाती है।
  • चन्द्रमा के परिक्रमण 27 दिन 8 घण्टे मे पूरी करता है। चन्द्रमा की परिक्रपण और परिभ्रमण दोनो अवधि समान है।
  • सी ऑफ टेन्क्विलिटी चन्द्रमा का वह भाग है। जो पृथ्वी से दिखाई नही देता है।

सूर्य का प्रकाष पृथ्वी पर 8 मिनट 20 सैकण्ड मे पहुचता है।
चन्द्रमा पर वायुमण्डल का अभाव पाया जाता है ।अतः ध्वनि सुनाई नही देती है।
चन्द्रमा पर गुरूत्वाकर्षण का मान पृथ्वी का मात्र 1/6 होता है।
पूर्णिमा से अमावस्या तक चन्द्रमा प्रतिदिन घटता बढता है। इन्ही को चन्द्रकलाए कहते है।

  • शुक्ल पक्ष – बढते हुए चॉद केा
  • कृष्ण पक्ष – घटते हुए चॉद को

Note:- जब चन्द्रमा और पृथ्वी एक रेखा मे आ जाते है। तो उसे सिजिगी कहते है।


चन्द्रग्रहणः-


ज्ब पृथ्वी .सूर्य और चन्द्रमा के बीच आ जाती है। तो सूर्य का प्रकाष चन्द्रमा पर नही पहॅुच पाता है।
चन्द्रग्रहण हमेषा पूर्णिमा की रात्रि में ही होता है परन्तु प्रत्येक पूर्णिमा को चन्द्रग्रहण नही होता है क्योकि चन्द्रमा व पृथ्वी कक्षा पथ में 5 डिग्री का अन्तर होता है एक वर्ष में अधिकतम तिन बार चद्रग्रहण होता है लेकिन ग्रहण आंषिक व पूर्ण भी हो सकता है।
सूर्य ग्रहण

जब पृथ्वी सूर्य और चन्द्रमा के बीच आ जाती है। तब सूर्य ग्रहण होता है।
पूर्ण सूर्यग्रहण केवल अमावस्या को होता है। लेकीन चन्द्रमा की कक्षा में झुकाव के कारण प्रत्येक बमावस्या को सूर्यग्रहण नही होता है।

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