मानव तंत्र HUMAN SYSTEM शरीरके भीतर ऐसे अंगों के कई समूहहैं जो एक-दूसरेसे जुड़े हैं या एक-दूसरेपर निर्भर हैं और एक साथमिलकर सामूहिक रूप में कार्य करते हैं। समान क्रिया ले सहयोगी अंगोंके इस समूह कोतंत्र (system) कहा जाता है। शरीर कीक्रियाएँनिम्नलिखिततंत्रोंद्वारासम्पादितहोतीहैं- 1) पाचन तंत्र (Digestive system) 2) श्वसन तंत्र (Respiratory system) 3) परिसंचरण तंत्र (Blood and Circulatory system) 4) उत्सर्जन तंत्र (Excretory system) 5) प्रजनन तंत्र (Reproductive system) 6) तंत्रिका तंत्र (Nervous system)
पाचन तंत्र ( Digestive System ) मानव भोजन के द्वारा शरीर के लिए आवश्यक ऊर्जा एंव कायिक पदार्थ प्राप्त करता है। भोजन विभिन्न घटकों जैसे प्रोटीन , कोर्बोहाइड्रेट , वसा, विटामिन , खनिज व लवण आदि से बना होता है।भोजन में इन में से अधिकतर घटक जटिल अवस्था में होते हैं। शरीर में अवशोषण हेतु […]
Biology = Bios(जीवन/ life)+logos(अध्ययन/Study) 1. जन्तु विज्ञान ( Zoology ) :- जन्तु विज्ञान के पिता- अरस्तु 2. वनस्पति विज्ञान ( Botany ):- वनस्पति विज्ञान का पिता – थियोफ्रेक्टसमानव शरीर के तंत्रमानव शरीर के तंत्र शरीर के भीतर ऐसे अंगों के कई समूह हैं जो एक – दूसरे से जुड़े हैं या एक – दूसरे पर निर्भर हैं और एक […]
मानव का पाचक तंत्र ( Digestive System ) पाचन तंत्र ( Digestive System ) मानव भोजन के द्वारा शरीर के लिए आवश्यक ऊर्जा एंव कायिक पदार्थ प्राप्त करताहै। भोजन विभिन्न घटकों जैसे प्रोटीन , कोर्बोहाइड्रेट , वसा, विटामिन , खनिज व लवण आदि से बना होता है।भोजन में इनमें से अधिकतर घटक जटिल अवस्था में […]
मानव तंत्र HUMAN SYSTEM शरीरके भीतर ऐसे अंगों के कई समूहहैं जो एक–दूसरेसे जुड़े हैं या एक–दूसरेपर निर्भर हैं और एक साथमिलकर सामूहिक रूप में कार्य करते हैं। समान क्रिया ले सहयोगी अंगोंके इस समूह कोतंत्र (system) कहा जाता है। शरीर कीक्रियाएँनिम्नलिखिततंत्रोंद्वारासम्पादितहोतीहैं– 1) पाचन तंत्र (Digestive system) 2) श्वसन तंत्र (Respiratory system) 3) परिसंचरण तंत्र (Blood and […]
प्रजननतंत्र जिस प्रक्रम द्वारा जीव अपनी संख्या में वृद्धि करते हैं , उसे प्रजनन ( Reproduction ) कहते हैं । प्रजनन जीवों का सर्वप्रमुख लक्षण है । इस पृथ्वी पर जीव – जातियों की सततता प्रजनन के फलस्वरूप ही संभव हो पायी है । इस प्रकार प्रजनन वह प्रक्रम है जिसके द्वारा जीव अपनी ही […]
आनुवांशिकी आनुवांशिकी – विज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत आनुवांशिक लक्षणों की वंशागति का अध्ययन किया जाता है । आनुवांशिकी का जनक – ग्रेगर जॉन मेण्डल । आनुवांशिकी लक्षण – संतति को अपने जनक से प्राप्त लक्षण । आनुवांशिकी के पुनः खोजकर्ता ( i ) कॉल कोरेन्स ( ii ) इरिक वॉन शेरमर्क ( iii […]
तंत्रिका तंत्र ( Nervous System ) तंत्रिका तंत्र ( Nervous System ) केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र ( Central N.S. ) परिधीय तंत्रिका तंत्र ( Peripharal N.S. ) स्वायत तंत्रिका तंत्र ( Autonomus N.S. ) मस्तिष्क ( Brain ) कपाल मेरूरज्जू कपाल तंत्रिकाएं ( 12 pair ) मेरू तंत्रिकाएं ( 31 pair ) अनुकम्पी ( Symphtic ) […]
हृदय ( Heart ) हृदय एक पेशीय अंग होता है । यह वक्षगुहा में कुछ बांयी ओर दोनों फेफड़ों के मध्य फुफ्फुस मध्यावकाश में स्थित रहता है । यह दोहरे आवरण पेरीकार्डियम से घिरा रहता है । हृदय की भित्ति तीन स्तरों की बनी होती है । सबसे बाहरी एपीकार्डियम , मध्य मायोकार्डियम व भीतरी […]
परिसंचरण तंत्र प्राणियों में दो प्रकार के रूधिर परिसंचरण तंत्र पाये जाते है 1. खुला रक्त परिसंचरण तंत्र इस तंत्र में हृदय द्वारा धमनियों में रूधिर पम्प किया जाता है जो बड़ी गुहाओं या रूधिर कोटरों या अवकाशों में खुलती है । इसमें रक्त प्रवाह धीमा रहता है । उदाहरण कीट , मकड़ी , घोंघा […]