चंद्रगुप्त मौर्य चंद्रगुप्त मौर्य ने अपने साम्राज्य विस्तार की नीति के तहत सर्वप्रथम उत्तरी भारत पर अधिकार किया। इस कारण चंद्रगुप्त मौर्य को भारत का प्रथम ऐतिहासिक सम्राट कहा जाता है जबकि मौर्य साम्राज्य को प्रथम ऐतिहासिक साम्राज्य कहां जाता है। ए पी यानस के वर्णन के अनुसार चंद्रगुप्त मौर्य ने मध्य एशिया के सम्राट […]
बिंदुसार के अन्य नाम ब्राह्मणों ग्रंथ में नंद सार , भद्र सार , वारी सार यूनानी ग्रंथ मैं अमित्र घात,अमित्र खाद जैन ग्रंथ में बिंदु पाल चीनी ग्रंथ में सिंहसेत बिंदुसार के समस्त सीरियाई (यूनान )का शासक एंटीयोकस था बिंदुसार ने एंटीयोकस को एक पत्र लिखा जिसके माध्यम से 3 वस्तुओं भारत भेजने को कहा। […]
सिंधु घाटी सभ्यता वृक्षवल्लय विधि उत्तर मांडा तक (कष्मीर) पष्चिम ¬(बलूचिस्तान में सुतकागेंडोर ) + पूर्व आलमगीरपुर (उतर प्रदेष) दक्षिण (दाइमाबाद )महाराष्ट्र सभ्यता का नाम स्थान उत्खन्न कर्ता नदी विषेष हडप्पा पाकिस्तान सिंध प्रांत मधोस्वरूप वत्सदयाराम साहनी (1920 से 21) रावी प्राप्त अवषेष:- विषाल अन्नागार ,अभिलेख युक्त मोहरे ,काॅसा गलाने का कारखाना,षंक से निर्मित बैल […]
मिश्रित यंत्र:- ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्वपूर्णताः मिश्र अर्थात् मिश्रित यंत्र में पांच अलग – अलग यंत्र समाहित है । दिल्ली की वेधशाला का यह एक अद्वितीय यंत्र है । ऐसा माना जाता है कि इसका निमार्ण महाराजा सवाई जय सिंह ( द्वितीय ) के पुत्र महाराजा माधोसिंह ( 1751-68 ) ने कराया था । इस […]
जैन एवं बौद्ध धर्म के उदय के कारण बौद्ध धर्म और जैन धर्म का उदय कब हुआ? 7वीं से 5वीं ई.पू. की अवधि के बीच के समय में एक निर्णायक मोड़ आया, जब पूरी दुनिया में बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास हुआ। इसी अवधि के दौरान भारत में जैन और बौद्ध धर्मों का पादुर्भाव हुआ। इस […]
दुर्गो के प्रकार :- कौटिल्य के मतानुसार दुर्गो को चार कोटियों में बाँट गया है , 1. औदक दुर्ग ( जल दुर्ग 2. पार्वत दुर्ग ( पर्वत दुर्ग ) या गिरि दुर्ग 3. धान्वन दुर्ग ( मरूस्थल दुर्ग ) 4. वन या आरण्य दुर्ग शुक्र नीति के अनुसार दुर्गा के नौ भेद बताए है 1. […]
हमीदा बेगम की गर्भ से वीर साला के महल में 15 अक्टूबर 1542 ईसवी को अकबर का जन्म हुआ था जो कि हुमायूं की मृत्यु के बाद भारत का शासक बना अकबर के बचपन का नाम बदरुद्दीन था जिसके द्वारा सुलह कुल की नीति का पालन किया था अकबर के संपूर्ण जीवन काल को तीन […]
शेरखाँ का असली नाम फरीद था उसे शेर खान की उपाधि बाहार खा लोदी ने दी थी मुद्रा सुधार रुपया – चांदी दाम – तांबे 1544 इसी में मेवाड़ पर आक्रमण मालदेव मालदेव के सैनिक नेता व शेरशाह ने कहा – मैं मुट्ठी भर बाजरे की खातिर भारत की बादशाह खो देता ग्रैंड ट्रंक रोड […]
जन्म 5 मई 1508 1530 ईस्वी नसरुद्दीन हुमायूं आगरा में सिंहासन पर बेठा चौसा का युद्ध 29 जून 1539 हुमायूं और शेरखा कन्नौज का युद्ध या बिलग्राम 17 मई 1540 ईस्वी हुमायूं और शेरशाह ( विजय) के मध्य हुमायूं के द्वारा 15 मई 1555 ईस्वी को पुन दिल्ली पर आक्रमण किया गया मछीवाड़ा का […]
जन्म 14 फरवरी 1483 जन्म स्थान फरगाना पिता उमरशेख मिर्जा माता कुतलुगनिगार खाली 1494 ई पिता की मृत्यु (बाबर 11 वर्ष का) 1496 ई समरकेद पर आक्रमण असफल 1497 ई समरकेद पर आक्रमण सफल 1497 ई फरगना व समरकेद पर अधिकार 1504 ई काबुल पर विजय 1505 ई मिर्जा के स्थान पर बादशाह की उपाधि भारत पर आक्रमण […]