राजस्थान की कृषि
कृषि विस्तार हेतु योजनाएं एवं कार्यक्रम
प्रधानमंत्री कृषि सिचाई परियोजना का प्रारम्भ 2015-16 में किया गया ।
केन्द्र व राज्य का अंश 60 : 40 है ।
हर खेत को पानी देना इस योजना का उदेश्य है ।
जल संचय व जल सिंचन के माध्यम से माइको लेवल पर जल संचयन इस योजना के तहत सूक्ष्म सिंचाई योजना प्रारम्भ की गई है ।
किसानों को मृदा की पोषण स्थिति व पोषक तत्वों की उचित मात्रा की जानकारी देने के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 19 फरवरी 2015 को सूरतगढ -गंगानगर
राजस्थान में प्रारम्भ की राज्य की पहली आर्गेनिक मंडी डूगरपुर जिले में खोली जाएगी ।
देश के पहले आर्गेनिक राज्य सिकिम की तर्ज पर राज्य का पहला आर्गेनिक जिला भी डूंगरपूर को बनाया जाएगा ।
7 अप्रैल 2016 को कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी ने ढिंढोल – बस्सी जयपुर में ड्रेगन फूट की खेती के लिए सेटर ऑफ एक्सीलेस की शुरूआत की ।
राजस्थान चौथा प्रदेश है जहा ड्रैगन फूट की खेती की जा रही है ।
उत्थान कार्यकम-
निजी खेतों में नरेगा से कार्य करने के लिए लाभ योजना ।
परम्परागत कृषि विकास योजना – 2015-16 एक नई योजना परम्परागत कृषि विकास योजना प्रारम्भ की गई ।
वित पोषण का अनुपात भारत सरकार व राज्य का 60:40 रहेगां
कृषि डाक– शुरूआती स्तर पर भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली द्वारा 20 जिलों में लागू किया गया ।
बस्से में बीज विधायनल केन्द्र का लोकार्पण- वसुंधरा ने 4 जनवरी 2015 को बस्सी ढिंढोल में कृषि फार्म में बीज विधायन केन्द्र तथा माधोगढ ग्राम में ट्रेनिंग सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का लोकार्पण किया ।
इंडो इजरायल संतरा उत्पादन कार्यकम- राजस्थान के कोटा में नान्ता फार्म में उत्कृष्टता केन्द्र शुरू किए गए है ।
जातून की रफाइनरी बीकानेर जिले में लूणकरणसर में लगाई गई है ।
इसका उद्घाटन 3 अक्टूबर 2014 को किया गया ।
राजस्थान ऑलिव कल्टीवेशन लिमिटेड द्वारा संस्थापित यह देश की पहली जैतून रिफाइनरी है ।
जैतून के तेल को प्रदेश में राजा ऑलिव ब्रांड के नाम से बेचा जाएगा । जैतून के तेल का उत्पादन करने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य है ।
बीकानेर संभाग के चारों जिलो बीकानेर श्रीगगानगर हनुमानगढ और चुरू में खजूर की खेती की अनूकूल संभावनाएं देखते हुए इस संभाग को खजूर का हब बनाया जाएगा ।
खजूर के पौधो हेतु जोधपुर जिले में एक विश्वस्तरीय टिश्यूकल्चर प्रयोगशाला की स्थापना की गई है ।
इस हेतु अतुल राजस्थान खजूर लिमिटेड की स्थापना की गई ।
वेजीटेबल इनिशियेटिव फॉर अर्बन क्लस्टर योजना राजस्थान में जयपुर , सीकर , अलवर , अजमेर में सस्ती एवगुणवतायुक्त सब्जियों की उपलब्धता कराने हेतु शुरू ।
बांसवाडा और कुभलगढ में लीची की खेती को प्रोत्साहन दिया जा रहा है ।
राजस्थान में स्थापित सेन्टर ऑफ एक्सीलेंस
1. सेन्टर ऑफ एक्सीलेंस , झालावाड़
2. सेन्टर ऑफ एक्सीलेंस देवडावास टोंक
3. सेन्टर ऑफ एक्सीलेंस खेमरी धोलपुर- आम बेर अमरूद आवला व जेतून के लिए
4. सेन्टर ऑफ एक्सीलेंस फॉर सिट्रस , प्रजनन फलोद्यान , नान्ता कोटा
5. सेन्टर ऑफ एक्सीलेंस फॉर अनार , ढिंढोल फार्म बस्सी जयपुर
6. सेन्टर ऑफ एक्सीलेंस फॉर खजूर , सगरा – भोजका फार्म जैसलमेर ।
2016-17 में स्वीकृत उत्कृष्टता केन्द्र
1. सब्जी फलो का उत्कृष्टता केन्द्र – बून्दी
2. सीताफल उत्कृष्टता केन्द्र – चितौडगढ
3. फूलों का उत्कृष्टता केन्द्र- सवाई माधोपुर
लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा राज्य को देश के सर्वाधिक सौर पम्प संयत्र स्थापना का प्रमाण पत्र दिया गया है ।
राष्ट्रीय तिलहन एवं ऑयल पाम मिशन ( एन . एम . ओ . पी ) 2004-05 ये चल रही आइसोपाम योना को अब राष्ट्रीय तिलहन एंव ऑयल पाम मिशन में परिवर्तित कर दिया गया है ।
राज्य में मक्का के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना उदयपुर में की जाएगी ।

राजस्थान के प्रमुख कृषि अनुसंधान केन्द्र
1. बेर अनुसंधान केन्द्र एवं खजूर अनुसंधान केन्द्र , बीकानेर- 1978
2. केन्द्रीय कृषि अनुसंधान केन्द्र दुर्गापुरा जयपुर 1943
3. केन्द्रीय कृषि फार्म , सूरतगढ गंगानगर 15 अगस्त 1956
4. केन्द्रीय कृषि फार्म जैतसर गंगानगर
5. केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान बीछवाल बीकानेर
6. राष्ट्रीय सरसों अनुसंधान निदेशालय सेवर भरतपुर- 20 अक्टूबर 1993 फरवरी 2009 में इसका नाम बदलकर सरसों अनुसंधान निदेशालय कर दिया है ।
7. राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण एवं भूमि उपयोग नियोजन ब्यूरो , उदयपुर ।
कृषि विश्वविद्यालय
1. स्वामी केशवानन्द राजस्थान कृषि विश्वविषलय- बीछवाल बीकानेर- राज्य में प्रथम कृषि विश्वविद्यालय 1962 में उदयपुर में स्थापित किया गया । कृषि विश्वविद्यालय स्थापित करने वाला देश का दूसरा राज्य बना । राजस्थान में यह 1964 में बहुसंकाय विश्वविद्यालय के रूप में परिणित हो गया एवं इसका नाम मोहनलाल सुखाडिया विश्वविद्यालय रखा गया । 1987 में उससे कृषि संकाय अलग कर राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर की स्थापना को गई । 9 जून 2009 को इसका नाम स्वामी केशवानन्द राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय रखा गया ।
2. महाराणा प्रताप कृषि व तकनीकी विश्वविद्यालय उदयपुर -1 नवम्बर 1999 को स्थापित किया गया | प्रारम्भ में इसका नाम कृषि विश्वविद्यालय उदयपुर था । राजस्थान का दूसरा कृषि विश्वविद्यालय था ।
3. राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय उदयपुर जुलाई 1955
4. डेयरी व फूड साइंस तकनीकी कॉलेज , उदयपुर 1982
5. तकनीकी व इंजीनियरिंग महाविद्यालय उदयपुर
6. मत्स्य महाविद्यालय उदयपुर मार्च 2010
7. गृह विज्ञान महाविद्यालय – उदयपुर 1966
8. श्री कर्ण नरेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय जोबनेर जयपुर सितम्बर 2013 ।
9. SKN कृषि कॉलेज राज्य का पहला कृषि महाविद्यालय है ।
10. कृषि विश्वविद्यालय मंडोर जोधपुर 14 सितम्बर 2013
11. कृषि विश्वविद्यालय बोरखेडा कोटा 14 सितम्बर 2013 बागवानी व वानिकी महाविद्यालय झालावाड इसके अधीन है ।
कृषि विकास हेतु प्रयासरत राष्ट्रीय स्तर की संस्थाएं
1. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद- 1929
2. राजस्थान राज्य सहकारी कय विकय संघ लि- 1957
3. राजस्थान राज्य भंडारण निगम- 1957
4 राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ लिमिटेड नई दिल्ली- 1958
5. राष्ट्रीय बीज निगम- मार्च 1963
6. राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम- मार्च 1963
7. भारतीय खाद्य निगम – 1964
8. राज्य कृषि उद्योग निगम- 1965
9. इफको- 1967
10. कृषिगत वित निगम- अप्रेल 1968
11. राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड- 6 जून 1974
12. राजस्थान राज्य बीज एंव जैविक उत्पादन प्रमाणीकरण संस्था , जयपुर- 1977
13. कृभको 1980
14. कृषि विपणन निदेशालय- 1980
15. राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक ( NABARD- national Bank for Africulture and Rural Development ) – 12 जुलाई 1982
16. चौधरी चरणसिंह राष्ट्रीय कृषि विपणन संस्थान- 1988
17. श्री गंगानगर कॉटन कॉम्पलैक्स- 1989
18. तिलम संघ लि -1990
19. राजस्थान राज्य सहकारी स्पिनिंग व जिनिंग मिल्स फेडरेशन लि जयपुर- 1992
20. राज्य कृषि प्रबंध संस्थान- 1993
21. राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केन्द्र तबीजी अजमेर- 2000
22. राजस्थान उद्य ानिकी एव नर्सरी विकास समिति- राजहंस- 2006-07
राजस्थान में कृषि की महत्वपूर्ण विशेषताए
राजस्थान देश का कृषि प्रधान राज्य है ।यहां की कुल आबादी का लगभग 75 प्रतिशत कृषि पर निर्भर हैं प्रदेश के कुल कृषित क्षेत्रफल का लगभग 30 प्रतिशत भाग सिंचित है
राज्य में बाजरे का सर्वाधिक उत्पादन बाडमेर में होता हैं
राजस्थान में कृषि को मानसून का जुआ कहते है ।
राजस्थान में भारत के कुल कृषित क्षेत्रफल का 11 प्रतिशत है ।
राजसीन में सर्वाधिक सिंचाई कुओं व नलकूपों से होती हैं
राज्य में कृषि जातों का औसत आकार 365 हैक्टेयर ( देश में सर्वाधिक ) है
राज्य में सर्वाधिक कृषि क्षेत्र लगभग एक चौथाई भाग में बाजरा बोया जाता है
गेहू राज्य में सर्वाधिक मात्रा में उत्पादित होने वाली फसल हैं
राज्य के कुल कृषित क्षेत्रफल का 2/3 भाग खरीफ के मौसम में बोया जाता है
राज्य में कपास की फसल हनुमानगढ व गंगानगर में होती हैं
राज्य में कृषि में सर्वाधिक क्षेत्रफल बाजरे का है । राज्य में बंजर एवं व्यर्थ भूमि का सर्वाधिक क्षेत्रफल जैसलमेर जिले में है ।
कृषि क्षेत्र का राज्यस में सकल घरेलू उत्पाद में सामान्यत 24 से 30 प्रतिशत हिस्सा रहता हैं
राज्य में तिलहन फसलों में सर्वाधिक उत्पादन राई व सरसों का अनाज में गेहूं का एवं दालों में सर्वाधिक चने का होता है ।
राजस्थान में सर्वाधिक सिंचित क्षेत्रफल
गंगानगर जिले में 87 प्रतिशत तथा न्यूनतम चूरू जिले में 5 प्रतिशत है । राज्य की खाधान्न फसलों में मुख्यतः बाजरा , गेहूं , ज्वार , जौ , चावल , रागी है ।
राज्य में खरीफ फसलों में सर्वाधिक क्षेत्र बाजरे व रबी फसलों में सर्वाधिक गेंहू का रहता हैं
राज्य की रेशेदार फसले कपास व सन है । महाराणा प्रताप कृषि व तकनीकी विश्वविद्यालय उदयपुर में स्थापित है । राज्य में कुल कृषित क्षेत्रफल सर्वाधिक बाडमेर जिले में तथा न्यूनतम राजसमंद जिले में है । राज्य में प्रथम कृषि नीति 28 जुलाई 2000 को केन्द्रीय सरकार द्वारा घोषित की गई सोजत – पाली की मेहंदी के अतिरिक्त लाल सुर्ख रंग के लिए गिलूड- राजसमंद की मेंहदी प्रसिद्ध है । राजस्थान में प्रथम कृषि विश्वविद्यालय 1962 में उदयपुर में स्थापित किया गया इसका नाम बाद में मोहनलाल सुखाडिया विश्वविद्यालय रखा गया । राजस्थान में कृषि पद्धतियों का वर्गीकरण शुष्क कृषि -बागानी -50 सेमी से कम वर्षा वाले क्षेत्रों में ।
राज्य में एक वर्ष में एक ही खेत में खर फसलें उगाने की प्रकिया को रिले कॉपिंग कहा जाता है आई कृषि’- 100 सेमी से अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में । राज्य के बारां , झालावाड , कोटा , बांसवाडा , चितोडगढ में आर्द्र कृषि की जाती हैं झूमिंग कृषि – डूंगरपू , उदयपूर , प्रतापगढ , बांसवाडा क्षेत्र में जंगल में आग लगाकर बची राख फैलाकर वर्षा होन पर अनाज बोकर फसल तैयार की जाती है । उसे झूमिंग कृषि या स्थानान्तरित कृषि कहते हे । आदिवासियों में यह वालरा नाम से जानी जाती हैं पहाडी क्षेत्रों में वालरा चिमाता एवं मैदानी क्षेत्रों में वालरा दजिया कहलाती हैं सिंचित कृषि- राज्य की लगभग 32 प्रतिशत कृषि भूमि वर्षा के अलावा अन्य स्त्रोतो से पानी देकर तैयार की जाती हैं 50 से 100 सेमी वर्षा वाले क्षेत्रों में की जाती है । अलवर , भरतपुर , करौली , सवाईमाधोपुर , भीलवाडा , अजमेर , गंगानगर , हनुमानगढ़ जिले ।
राजस्थान की महत्वपूर्ण फसले मक्का सर्वाधिक उत्पादन –
उदयपुर अन्य जिले- भीलवाडा , बांसवाडा , राजसमंद , झालावाड देश के कुल मक्का उत्पादन का 8.4 प्रतिशत राजस्थान मे । किस्मे- माही कंचन , माही धवल , सविता बाजरा सर्वाधिक उत्पादन- जयपुर अन्य जिले- नागौर , जोधपुर , सीकर , जालोर , बाडमेर , चुरू देश के उत्पादन का लगभग 1/3 राजस्थान में देश में प्रथम स्थान- उत्पादन व क्षेत्रफल दोनों में राज्य के 1/4 भाग में बाजरा बोया जाता हैं ज्वार सर्वाधिक उत्पादन- अजमेर अन्य जिले- पालो , टोंक , भरतपुर , अलवर , जयपुर , नागौर क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान का तीसरा स्थान व उत्पादन की दृष्टि से पांचवा स्थान । सर्वाधिक उत्पादन- श्रीगंगानगर अन्य जिले- अलवर , भरतपुर , बूंदी , चितोडगढ , जयपुर , बारां देश के कुल उत्पादन का 8-9 प्रतिशत राजस्थान में । उत्पादन की दृष्टि से उतरप्रदेश प्रथम पंजाब द्वितीय राजस्थान पांचवे स्थान पर है।गेंहू राज्य में सर्वाधिक मात्रा में उत्पादित होने वाली फसल है ।
चावल सर्वाधिक उत्पादन-
हनुमानगढ़ अन्य जिले’- बांसवाडा , बूंदी , कोटा , गंगानगर , डूंगरपूर भारत चीन के बाद दुनिया का सबसे बडा चावल उतपादक देश । सर्वाधिक चावल पश्चिमी बंगाल व उतर प्रदेश में होता हैं जौ सर्वाधिक उत्पादन – जयपुर अन्य जिले – हनुमानगढ , गंगानगर , अलवर.सीकर , भीलवाडा , झूझनू , अजमेर क्षेत्रफल व उत्पादन की दृष्टि से उतर प्रदेश के बाद राजस्थान का दूसरा स्थान है । राज्य में देश के कुल उत्पादन का 29 प्रतिशत होता है । कुल अनाज सर्वाधिक उत्पादन- अलवर अन्य जिले- जयपुर , हनुमानगढ , गंगानगर देश में उत्पादन में प्रथम- उतर प्रदेश । क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान का तीसरा स्थान , उत्पादन की दृष्टि से 7 वां स्थान मोंठ सर्वाधिक उत्पादन- बाडमेर अन्य जिले- चुरू , बीकानेर , नागोर , जोधपुर , बाडमेर , जालौर , हनुमानगढ राज्य में 40 प्रतिशत क्षेत्र पर मोठ बोई जाती हैं चना सर्वाधिक उत्पादन – बीकानर अन्य जिले- चुरू , हनुमानगढ , गंगानगर , झुंझनू , सीकर देश में उत्पादन की दृष्टि से राज्य का तीसरा स्थान है । मूंग सर्वाधिक उत्पादन- नागौर अन्य जिले- जोधपुर , नागोर , जयपुर , अजमेर , टोंक , पाली नागौर पाली अजमेर क्षेत्र में मूंग को स्थानीय भाषा में हरिया कहते है । उडद सर्वाधिक उत्पादन- भीलवाडा अन्य जिले- झालावाड , बूंदी . बांसवाडा , टोंक , कोटा भूमि की उर्वरता बढाने के लिए बोई जाती हैं चंवला सर्वाधिक उत्पादन – सीकर अन्य जिले – झूझनू , नागौर , जयपुर इसे चौला भी कहते है ।
अरहर सर्वाधिक उत्पादन –
बांसवाडा अन्य जिले- उदयपुर.जयपुर.टोंक स्थानीय भाषा में आरैड कहते है । मसूर सर्वाधिक उत्पादन- बूंदी अन्य जिले- भीलवाडा , चितोडगढ , झालावाड , भरतपुर कुल दलहन सर्वाधिक उत्पादन – बीकानेर अन्य जिले- नागौर , झूझनू , सीकर देश में उत्पादन की दृष्टि से राज्य का छठा स्थान हैं देश की 7 प्रतिशत दालें उत्पादित होती हैं सर्वाधिक उत्पादन उत्तर प्रदेश में होता है । सर्वाधिक कृषि क्षेत्र – दलहन का महाराष्ट्र में है । मूंगफली सर्वाधिक उत्पादन – बीकानेर अन्य जिले- भरतपुर , जयपुर , सीकर , चुरू , जोधपुर , चितोडगढ , नागौर देश में सर्वाधिक उत्पादन गुजरात व आन्ध्रप्रदेश में होता है । राजस्थान का छठा स्थान राई व सरसों सर्वाधिक उत्पादन – टोंक अन्य जिले – गंगानगर , अलवर भरतपुर , बारां , कोटा , सवाईमाधोपुर , करौली देश के कुल उत्पादन का एक तिहाई से अधिक अकेले राजस्थान से । राजस्थान का देश में प्रथम स्थान । तिल सर्वाधिक उत्पादन — पाली अन्य जिले- सवाईमाधोपुर , भीलवाडा , जोधपुर , टोंक , करौली राजसीीन का संपूर्ण भारत में तिल का क्षेत्रफल की दृष्टि से दूसरा स्थान है । उत्पादन में पांचवा स्थान हैं
अलसी सर्वाधिक उत्पादन –
नागौर अन्य जिले- बीकानेर , झालावाड , सवाईमाधोपुर , बारा , बूंदी , उदयपुर भारत रूस व कनाडज्ञ के बाद तीसरा बडा उत्पादक देश है । मध्य प्रदेश प्रथम । तारामीरा सर्वाधिक उत्पादन – नागौर अन्य जिले- बीकानेर , गंगानगर . जयपुर . पाली . टोंक . जालोर , भीलवाडा , सवाई माधोपुर स्थानीय भाषा में इसे गंदिया एवं पापडा कहते है । सोयाबीन सर्वाधिक उत्पादन – बारा अन्य जिले- झालावाड , चितोडगढ , कोटा , बांसवाडा कोटा में सोयाबीन परियोजना शुरू । देश में उत्पादन में राज्य का तीसरा स्थान । अरण्डी सर्वाधिक उत्पादन – जालौर अन्य जिले- जालौर , पाली , बाडमेर देश में उत्पादन में राज्य का तीसरा स्थान । कुल तिलहन सर्वाधिक उत्पादन – बारां अन्य जिले- बारां , अलवर , झालावाड , कोटा कुल तिलहनों की दृष्टि से राजस्थान का देश में तीसरा स्थान । प्रथम मध्यप्रदेश दूसरा गुजरात भारत में विश्व का सर्वाधिक उत्पादन गन्ना सर्वाधिक उत्पादन – गंगानगर अन्य जिले- गंगानगर , चितौडगढ , उदयपुर , बांसवाडा , राजसमंद भारत विश्व का सबसे बडा गन्न उत्पादन देश है । सर्वाधिक गन्ना उतरप्रदेश व महाराष्ट्र में होता हैं कपास सर्वाधिक उत्पादन हनुमानगढ़ अन्य जिले- गंगानगर , नागौर , जोधपुर , भीलवाडा , बांसवाडा विश्व में भारत उत्पादन व क्षेत्रफल की दृष्टि में प्रथम स्थान पर है राजस्थान का देश में छठा स्थान हैं देश का सर्वाधिक कपास गुजरात में उत्पादन होता है ।
जीरा सर्वाधिक उत्पादन-
जोधपुर अन्य जिले- बाडमेर , जालौर , नागौर , अजमेर धनिया सर्वाधिक उत्पादन – झालावाड अन्य जिले- बारा , कोटा , बूंदी . चितोड ईसबगोल सर्वाधिक उत्पादन- जालौर अन्य जिले- बाडमेर , जोधपुर , जैसलमेर मैथी सर्वाधिक उत्पादन – बीकानेर अन्य जिले- कोटा नागौर , सीकर , झुंझनू , झालावाड नागौर की हरी मैथी – पान मैथी अपनी खुशबू के लिए प्रसिद्ध है । राज्य की फसलों का वर्गीकरण खरीफ / सियालु- जून – जुलाई में बोई जाती है व सितम्बर अक्टूबर में काटी जाती है । चावल , ज्वार , बाजरा , मक्का , अरहर , उडद , मूंग , चवला , मोठ , मूंगफली , अरण्डी , तिल , सोयाबीन , कपास , गन्ना , ग्वार आदि । राज्य की 90 प्रतिशत खरीफ फसले बारानी क्षेत्र में पैदा की जाती है । खाद्यान्नों में बाजरे का कृषित क्षेत्रफल सर्वाधिक है । रवी / उनालू- अक्टूबर – नवम्बर में बोकर मार्च – अप्रेल में काटी जाती है । सर्वाधिक क्षेत्र गेहूं का होता है । राई व सरसों की खेती की जाती है ।
फसले-
गेहूं , जो , चना , सरसों , मसूर , मटर , अलसी , तारामीरा , सूरजमुखी , धनिया , जीरा , मेथी ।
जायद- मार्च से जून के मध्य । तरबूज , खरबूजा . ककडी . सब्जियां राजस्थान में उद्यानिकी / बागबानी वर्तमान में राज्य देश में बीजीय मसालों धनिया जीरा एवं मेथी के उत्पादन में प्रथम स्थान पर है । धीनया का 50 प्रतिशत , जीरे का 60 प्रतिशत , मेथी का 47 प्रतिशत , सौंफ का 16 प्रतिशत है । राज्य ने मसालों के अंतर्गत कृषित क्षेत्र की दृष्टि से संपूर्ण देश में प्रथम स्थान हासिल किया है जबकि मसाला उत्पादन की दृष्टि से राज्य देश में दूसरे स्थान पर है । राज्य में सर्वाधिक फल गंगानगर में तथा सर्वाधिक मसाले बारां में होते है । ईसबगोल एव सोनामुखी के उत्पादन में देश संपूर्ण विश्व में प्रथम स्थान पर है । भारत सर्वाधिक ईसबगोल राजस्थान का उत्पादित होता है । विश्व में ईसबगोल उत्पादन का 40 प्रतिशत उत्पादन जालौर में होता है राजस्थान में बागवानी फसलों के प्रमुख उत्पादक जिले फसल प्रमुख उत्पादक जिले तम्बाकू अलवर , झूझनू आम चितोडगढ , अलवर , उदयपुर , ईसबगोल बाडमेर , नागौर , जालौर , डूंगरपुर जैसलमेर मौसमी , माल्टा , किन्नू श्रीगंगानगर , हनुमानगढ़ जीरा जोधपुर , जालौर , बाडमर संतरा झालावाड , कोटा सौंफ सिरोही , टोक , जोधपुर नींबू केला बासंवाडा , चितोडगढ अमरूद सवाई माधोपुर . कोटा बेर भरतपुर , जयपुर , जोधपुर आंवला अजमेर , नागौर , जयपुर अंगूर श्रीगंगानगर , सवाईमाधोपुर पपीता टोंक , भरतपुर सीताफल राजसमंद , उदयपुर गुलाब पुष्कर , खमनौर – राजसमंद अनार हनुमानगढ.पाली , जालौर , चितौड हरी मैथी नागौर शहतुत जयपुर , बांसवाडा टमाटर जयपुर , जालौर , सिरोही खरबूजा पाली , टोंक भरतपुर , करौली
राजस्थान की फसलों की विभिन्न किस्में मक्का माही कंचन , माही धवल ग्वार दुर्गाविहार , दुर्गापूरा , सफेद एवं सोना कल्याण , सोनालिका , दुर्गा जय मैक्सिकन , कोहिनूर चावल माही सुगन्धा , बासमती , कावेरी , ज्योति , राजकिरण चम्बल एव परमल राई व सरसों पूसा कल्याणी , वरूणा एवं दुर्गामणि मूंगफली तम्बाकू निकोटिना टुबेकम , निकोटिना , आलू कुफरी रास्टिका कपास बीकानेरी , नरमा , गंगानगर , अगेती ज्वार राजस्थान चरी , सी एस.वी 10 मोठ जडिया एव ज्वाला अन्य महत्वपूर्ण तथ्य ग्वार के निर्यात जोन- पांच जिलों जोधपुर , पाली , बाडमेर , बीकानेर , श्रीगंगानगर में ग्वार के लिए कृषि निर्यात जोन स्थापित किए गए है । निजी क्षेत्र की पहली कृषि मंडी 29 नवम्बर 2005 को कोटा जिले के कैथून में प्रारम्भ । हरित क्रांति के जनक नोरमन बोरलॉग है । मुहाना जयपुर में राज्य में पहला टर्मिनल मार्केट स्थापित किया गया है । झालावाड को राजस्थान का नागपुर कहा जाता है क्योंकि वहा सत्तरे की खेती व्यापक स्तर पर होती है । राज्य में पीली कांति तिलहन उत्पादन से सम्बन्धित है । राज्य में दुग्ध उत्पादन को बढावा देने हेतु 1970 में श्वेत कांति लाई गई ।
राज्य में नीली कांति का सबध मछली उत्पादन से है । जालौर जिला ईसबगोल . जीरा , टमाटर व बेदाना अनार के उत्पादन में अग्रणी है । अजमेर के निकट तबीजी गांव में राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केन्द्र स्थापित किया गया है । आम , केला , अंगूर , खट्टे नींबू , चीकू के उत्पादन में भारत विश्व में सबसे अग्रणी है । राज्य का पहला कृषि रडियो स्टेशन भीलवाडा में खोला गया । कपास को राजस्थान में ग्रामीण भाषा में बणियां कहते है । राज्य में सर्वाधिक हल्दी उत्पादन झाडोल- उदयपुर में होता है । कांगणी- दक्षिणी राजस्थान के गरीब व आदिवासी बाहुल्य शुष्क क्षेत्रों की फसल है । राजस्थान सहकारी डेयरी फेडरेशन का सीड मल्टीप्लीकेशन फार्म रोजडी – बीकानेर में स्थित है । कपास प्रदेश में उगाई जाने वाली नरमा कपास के कुल क्षेत्रफल का 80 प्रतिशत गंगानगर व हनुमानगढ़ में होता है । धमासा एक प्रकार की खरपतवार है जो जयपुर क्षेत्र में पाई जाती है ।। राष्ट्रीय सरसों अनुसंधान केन्द्र की स्थापना 20 अक्टूबर 1993 में भरतपुर जिले में सेवर में की गई । चैती दशमक गुलाब- खमनौर राजसमंद एवं नाथद्वारा राजसमंद में इसकी खेती होती है । वाटर मैनेजमेंट पार्क- श्री गंगानगर के कृषि विज्ञान केन्द्र के पदमपुर फार्म में वाटर मेनेजमेंट पार्क की स्थापना करेगा । पादप क्लीनिक- मंडोर स्थित कृषि अनुसंधान केन्द्र में राज्य के पहले पादप क्लीनिक को खोलने की मंजूरी दी है । इजराइल की प्रमुख कृषि कम्पनी नान देन एग्रो पीआरओ के द्वारा बस्सी -जयपुर में खेती प्रस्तावित है ।
राजस्थान की प्रमुख फसलें कृषि विकास के नवीनतम प्रयास सावित्री बाई फुले महिला कृषक सशक्तिकरण योजना- 50 हजार रू से अधिक का ई भुगतान प्राप्त करने पर 1000 रू की प्रोत्साहन राशि सीधे महिलाओं के खाते में जमा की जाएगी । डिजिटल लेनदेन को प्रोत्साहन देने के लिए कृषि उपज विकय ई भुगतान प्रोत्साहन योजना लागू की जाएगी । महात्मा ज्योतिबा फूले श्रमिक कल्याण योजना के तहत हमाल एवं पल्लेदारों की पुत्रियों के विवाह के हेतु सहायता राशि 20000 रू स बढाकर 50000 रू की गई है । आधुनिक खेती एवं विपणन की जानकारी के लिए मुख्यमंत्री काश्तकार विदेशी प्रशिक्षण यात्रा योजना प्रारम्भ की जायेगी । कृषि उपज मंडी समिति मदनगंज किशनगढ में दलहन विशिष्ट मण्डी बनाए जाने की घोषणा की गई है । जयपुर जिले में ग्राम बस्सी में जैतून की पती से चाय बनाने की फैक्ट्री स्थापित की गई । राष्ट्र में प्रथम बार राजस्थान में जैतून को प्लान्टेशन कॉप अधिसूचित किया गया है । कृषि एवं उससे सबंधित गतिविधियों के प्रशिक्षण के लिए पण्डित दीनदयाल उपाध्याय कौशल केन्द्र निर्माण एवं संचालन योजना ।
झालावाड के फोरेस्ट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में जैविक खेती के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जाएगी । प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के वेबपोर्टल का 24 अक्टूबर 2016 को जयपुर में लोर्कापण कर राजस्थान देश का दूसरा राज्य हो गया है । agricultural Marketing and Famrmer Friendly Reforms Index में राजस्थान का देश में तीसरा स्थान है । राज्य को गेहूं के सर्वाधिक उत्पादन के लिए कृषि कर्मण अवार्ड दिया गया । कृषि में निवेश हेतु राजस्थान कृषि प्रसंस्करण एवं कृषि विपणन प्रोत्साहन नीति 2015 जारी । श्रीगंगानगर , कोटा एवं खेरथल मण्डी समितियों में बहुउदेशीय एग्रो ट्रेंड टावर की स्थापना की जा रही है । कृषि उपज मंडी समिति मुहाना , जयपुर में पुष्प मंडी की स्थापना । मक्का विशिष्ट मंडी निम्बाहेडा में गाजर विशिष्ट मंडी साधुवाली – श्रीगंगानगर में व जीरा व विशिष्ट मंडी बाडमेर में स्थापित होगी । राज्य में तीन उत्कृष्टता केन्द्र कमश संतरा ‘ झालावाड , अमरूद – टोंक , आम – धौलपुर में स्वीकृत । प्राकृतिक एवं कृषि से उत्पन्न होने वाली आयूर्वेद औषिधियों के संरक्षण संवर्धन एव विपणन हेतु राज्य कृषि बोर्ड द्वारा उदयपुर को हर्बल मंडी घोषित किया गया । सीकर जिले के रसीदपुरा में प्याज की विशिष्ट मंडी बनेगी । घर की छत पर ही जैविक सब्जियां उत्पादित करने के लिए 27 अप्रैल 2016 को शहरी प्रोत्साहन कार्यकम शुरू किया गया । 23 से 29 दिसम्बर 2015 तक राजस्थान सरकार द्वारा जय जवान जय किसान सप्ताह समारोह आयोजित किया गया । ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट ( ग्राम ) 2016 उन्नत किसान और खुशहाल राजस्थान- के लिए ग्लाबल राजस्थान एग्रीटेक मीट का 9 से 11 नवम्बर 2016 तक जयपुर में कृषि विभाग द्वारा आयोजन किया गया । 24 से 26 मई 2017 को कोटा में तीन दिवसीय ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट का आयोजन किया गया । प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना -2016 में शुरू की गई