सूरत अधिवेशन 1907
1907 ई में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन सूरत में आयोजित किया गया था
जिससे अध्यक्ष पद को लेकर उदारवादी युग में उग्रवादियों के नेताओं के मध्य मतभेद हो गया
उदारवादी दल के नेता राज बिहारी बोस को अध्यक्ष बनाना चाहते थे जबकि उग्रवादी दल के नेता बाल गंगाधर तिलक को अध्यक्ष बनाना चाहते थे
राज श्री हरि गोश्त को सूरत का अध्यक्ष चुना गया इस कारण उग्रवादी दल के नेता नाराज हुए तथा उन्होंने कांग्रेस से अलग होने की घोषणा की इसी ही कांग्रेस का विभाजन सूरत विभाजन या सूरत अधिवेशन कहते हैं
लाला लाजपत राय ने कांग्रेस को खूब मेंढक की संज्ञा दी
उग्रवादी दल के नेता ने कांग्रेस को लॉर्ड डफरिन के दिमाग की उपज बताया है तथा कांग्रेसका जन्म विटी सरकार के रक्षा कवच के रूप में हुआ
Er. Dinesh