विश्व विरासत जयपुर शहर का आज 293वां स्थापना दिवस (Foundation Day of Jaipur) है.

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 विश्व विरासत जयपुर शहर का आज 293वां स्थापना दिवस (Foundation Day of Jaipur) है. विरासत और विकास की जुगलबंदी जो इस शहर में है, शायद ही कहीं और हो, लेकिन हमारा ‘जैपर’ विश्व का पहला ऐसा शहर है. जिसकी कल्पना बसावट से करीब 150 साल पहले ही कर ली गई. जयपुर को बसाने वाले सवाई जयसिंह द्वितीय रहे जिन्होंने 18 नवम्बर, 1727 को स्थापना की. हालांकि बसावट के बाद भी शहर करवटें बदलता रहा और जैपर से आज मेट्रो सिटी बन गया. इस बीच जयपुर को विश्व विरासत का दर्जा भी मिला. स्मार्ट सिटी का काम भी धरातल पर उतरने लगा है. समय के साथ जयपुर शहर का नाम भी बदलता रहा. जैपर, यहां का सबसे पहला नाम था, जो बाद में अंग्रेजी मिनिंग के हिसाब से बदलता हुआ जयपुर हो गया. 

महाराजा सवाई जयसिंह का बसाया जयपुर शहर 293 साल का हो गया है. जयपुर नगर निगम ग्रेटर और हैरिटेज की ओर से मोती डूंगरी स्थित गणेशजी के मंदिर में पूजा अर्चना कर न्यौता दिया गया और उसके बाद गंगापोल गणेशपोल गेट पर ऊंचाई पर स्‍थापित गणपति की प्रतिमा की पूजा अर्चना करने के लिए नगर निगम ग्रेटर मेयर सौम्या गुर्जर और हैरिटेज मेयर मुनेश गुर्जर ने क्रेन का सहारा लिया. कोरोना संक्रमण के चलते एक महीने तक समारोहपूर्वक मनाए जाने वाला स्थापना दिवस इस बार एक दिन के कुछ ही घंटों में आकर सिमट गया. दोनों महिला मेयर ने एक साथ जयपुर स्थापना दिवस पर पूजा अर्चना के कार्यक्रमों में शामिल होकर एक नजीर भी पेश की. उनका कहना है कि पार्टी और नगर निगम भले ही अलग अलग होm लेकिन जयपुर अलग नहीं हैं जयपुर सभी का एक ही हैं. इसलिए हम जयपुर के विकास के लिए एक साथ मिलकर काम करेंगे. जयपुर के हैरिटेज को कायम रखते हुए इसे ग्रेट बनाएंगे. हम जयपुर को मिलकर नंबर वन लेकर आएंगे.

बसावट के बाद भी बदलते शहर की करवटें बदलने की कहानी
-1727 को हुई गुलाबीनगरी जयपुर की स्थापना.
-1872 में शहर के बाजारों में टीनशेड लगवाई.
-1875 में सवाई रामसिंह ने शहर का गुलाबी रंग करवाया. इससे पहले का शहर सफेद रंग था. दरअसल वर्ष 1876 में प्रिंस ऑफ वेल्स (एडवड सप्तम) जयपुर आए थे, इसलिए गुलाबी रंग कराया गया.
-1942 में महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय और तत्कालीन प्राइमिनिस्टर सर मिर्जा इस्माइल ने जयपुर को आधुनिक रूप दिया. आजादी के बाद अतिक्रमण से बरामदे बंद होते गए.
-2000 में ऑपरेशन पिंक के दौरान शहर के बरामदे खाली कराए गए.
-5 फरवरी, 2020 को जयपुर बना विश्व धरोहर शहर. यूनेस्को महानिदेशक ऑड्रे अजोले ने वर्ल्ड हेरिटेज सिटी का प्रमाण पत्र दिया.
-23 सितंबर, 2020 से अब चांदपोल से बड़ी चौपड़ तक भूमिगत मेट्रो दौड़ रही है.
-10 नवंबर 2020 को शहर को पहली बार दो महापौर मिले. हेरिटेज नगर निगम की मुनेश गुर्जर महापौर चुनी गईं, वहीं जयपुर ग्रेटर की सौम्या गुर्जर महापौर बनीं.

जयपुर स्थापना दिवस पर डॉक्टर सौम्या गुर्जर ने कहा की हमारा जयपुर विश्व प्रसिद्ध है. इसके कलात्मक वैभव को निखारने में राजस्थान के करौली के पत्थर का उपयोग करेंगे. जयपुर नगर निगम ग्रेटर के सभी पार्को करौली के पत्थरों के शिलाखंड लगावाए जाएंगे जिसमें इतिहास, संस्कृति का जिक्र होगा और आने वाली युवा पीढी हमारे जयपुर के बारे में अच्छे से जान सकेगी. जयपुर विश्व का पहला शहर है, जिसका नक्शा पहले बना और स्थापना बाद में हुई. इसके आधार पर जयपुर का निर्माण हुआ और नक्शे के आधार पर बसा विश्व का पहला शहर बना.

जयपुर शहर के लिए कहा जाता है कि ‘जयपुर शहर नगीना, नीचे माटी ऊपर चूना’… जयपुर वास्तुकला के दृष्टिकोण से एक नायाब शहर है. इसका आर्किटेक्चर विद्याधर चक्रवर्ती ने तैयार किया. वहीं, महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय जो खगोलशास्त्र के बड़े विद्वान थे. जयपुर ज्योतिष और संस्कृति की नगरी है. जयपुर की जंतर-मंतर वेद्यशाला इसका जीवंत उदाहरण है. सवाई जयसिंह ने ज्योतिष के इतिहास को नया मोड़ देते हुए देशभर में जयपुर के साथ 5 यंत्रशाला बनाई, इनमें दिल्ली, उज्जैन, काशी और मथुरा शहर शामिल है. जतंर-मंतर पर ज्योतिष से जुड़ी हर सटीक जानकारी उपलब्ध होती है.

पिछले कुछ सालों से जयपुर में मेट्रो संस्कॄति के दर्शन होने लगे हैं. चमचमाती सडकें, बहुमंजिला शापिंग माल, आधुनिकता को छूती आवासीय कॉलोनियों, आदि महानगरों की होड करती दिखती हैं. पुराने जयपुर और नये जयपुर में नई और पुरानी संस्कॄति के दर्शन जैसे इस शहर के विकास और इतिहास दोनों को स्पष्ट करते हैं. जयपुर कितना भी बदले पर इसके व्यंजनों का जायका बदस्तूर कायम है, जयपुर के व्यंजन अनगिनत हैं. 

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