भारत में जल्द ही 5G सेवाएं शुरू हो सकती हैं. कोरोना के चलते इसको इस साल तक आ जाना था, लेकिन अब लगता है कि अगले साल तक इसके लिए इंतजार करना होगा.
5G आखिर क्या है? |
इसे अभी वर्तमान में चल रहे 4G LTE तकनीकी से भी तेज गति से चलने के लिए निर्मित किया गया है. हालांकि इसे मात्र स्मार्टफोन में इन्टरनेट की स्पीड को बढ़ाने को लेकर ही नहीं देखा जा रहा है. लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि इसके साथ फास्टर वायरलेस इन्टरनेट को सभी जगह सभी के लिए पहुंचाया जा सकता है.
5G को एक इंडस्ट्री स्टैण्डर्ड के तौर पर देखा जा सकता है जो वर्तमान में चल रहे 4G LTE स्टैण्डर्ड से कुछ आगे बढ़कर सामने आने वाला है. जैसे कि 3G के स्थान पर 4G ने अपनी जगह बनाई थी वैसे ही ऐसा माना जा रहा है यह fifth generation के स्थान पर 5G नाम से आने वाला है. इसका मतलब है कि यह इस स्टैण्डर्ड का पांचवां standard है.
स्टैंडर्ड 4G ऑफर लगभग 14 एमबीपीएस की डाउनलोड स्पीड देता है, जो कि इसके पहले के 3G नेटवर्क की तुलना में लगभग पांच गुना अधिक तेज है. वास्तव में, 4G नेटवर्क 150 एमबीपीएस तक की गति तक पहुंच सकता है, जिससे उपयोगकर्ता 3G नेटवर्क की तरह घंटों के बजाय मिनट या सेकंड में गीगाबाइट डाटा डाउनलोड कर सकते हैं.
डाटा अपलोड करना भी इसमें बहुत तेज है– स्टैण्डर्ड 4G अपलोड गति लगभग 8 एमबीपीएस तक हो सकती है, जिसमें सैद्धांतिक गति 50 एमबीपीएस तक पहुंचती है, जबकि 3G लगभग 0.5 एमबीपीएस तक ही सीमित रह जाती है. आप 5G पर केवल 3.6 सेकंड में, 4G पर 6 मिनट बनाम 3G पर 26 घंटे में दो घंटे की फिल्म डाउनलोड कर सकते हैं. इसका मतलब है कि 5G वर्तमान 4G तकनीक की तुलना में सौ गुना तेज होने वाला है.
भारत में नहीं बढ़ेंगी कीमतें |
5G के भारत में आने से माना जा रहा है कि टेलीकॉम कंपनियां अपनी कीमतों में बढ़ोतरी कर देंगी. हालांकि ऐसा मानना पूरी तरह से गलत है. ज्यादातर कंपनियां ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों को इस सेवा का लाभ देना चाहेंगी. इसके लिए वो कीमतों को कम ही रखेंगी, जिससे लोगों को इतनी ही कीमतों में सेवा मिल सकेगी.