पेशी संकुचनशील ऊतक है । पेशी का निर्माण पेशी कोशिकाओं से होता है । पेशी मनुष्य में सम्पूर्ण शरीर के भार का लगभग 10 % भाग बनाती है ,
पेशियों का अध्ययन मायोलोजी कहलाता है ।
संरचना व कार्यिकी के आधार पर पेशियों को तीन भागों में बांटा जा सकता है
- कंकाल पेशियाँ – इन्हें रेखित या ऐच्छिक पेशियाँ भी कहते हैं । इनको ऐच्छिक तंत्रिका तंत्र से तंत्रिकीय प्रेरणा प्राप्त होती है , इसलिए संकुचन जीव की इच्छानुसार होता है । ये पेशियाँ जल्दी थक जाती है । )
- हृदय पेशियाँ ये केवल हृदय में पाई जाने वाली रेखित व अनैच्छिक पेशियाँ है तथा ये स्वायत्त तंत्रिका तंत्र से तंत्रिका प्राप्त करती है । इनमें स्वतः उत्तेजनशीलता का गुण पाया जाता है तथा ये थकती नहीं है । यह हृदय के स्पंदन के लिए उत्तरदायी होती है । ,
- चिकनी पेशियाँ अन्तरागों जैसे आहारनाल , रूधिर वाहिनी आदि की भित्ति में पाई जाती है । ये अरेखित एवं अनैच्छिक पेशियाँ होती है । इनमें संकुचन धीमा होता है व थकान भी देरी से होती है ।
Er. Dinesh