ठोस अवस्था
पदार्थ कि तीन अवस्थाओं- ठोस , द्रव और गैस में पाये जाते हैं ।
तापऔरदाबकीदीगईनिश्चितपरिस्थितियोंमें , किसीपदार्थकीइनमेंसेकौनसेअवस्थाअधिकस्थायीहोगी , दोविरोधीकारकोंकेसम्मिलितप्रभावपरनिर्भरकरतीहै।अंतराआण्विकबलोंकीप्रवृत्तिअणुओं ( अथवापरमाणुओंअथवाआयनों ) कोसमीपरखनेकीहोतीहै , जबकिउष्मीयऊर्जाकीप्रवृत्तिउन्हेंतीव्रगामीबनाकरपृथकरखनेकीहोतीहै।पर्याप्तनिम्नतापमानपरउष्मीयऊर्जानिम्नहोतीहैऔरअंतराआण्विकबलउन्हेंइतनासमीपकरदेतेहैंकिवेएक – दूसरेकेसाथअनुलग्नितहोजातेहैंऔरनिश्चितस्थितियाँअध्यासितकरलेतेहैं।यहअबभीअपनीमाध्यस्थितियोंकेचारोंओरदोलनकरसकतेहैंऔरपदार्थठोसअवस्थामेंरहताहै।ठोसअवस्थाकेअभिलक्षणिकगुणधर्मनिम्नलिखित
- वे निश्चित द्रव्यमान , आयतन एवं आकार के होते हैं ।
- अंतराआण्विक दूरियाँ लघु होती हैं ।
- अंतराआण्विक बल प्रबल होते हैं ।
- उनके अवयवी कणों ( परमाणुओं , अणुओं अथवा आयनों ) की स्थितियाँ निश्चित होतो हैं और यह कण केवल अपनी माध्य स्थितियों के चारों ओर दोलन कर सकते हैं ।
- वे असंपीड्य और कठोर होते हैं
ठोस पदार्थों का वर्गीकरण (Classification of solids)
ठोस पदार्थों को उनके particles (कणों) की व्यवस्था में उपस्थित क्रम की प्रकृति के आधार पर निम्नांकित दो भागों में बाँटा जा सकता है।
(1) अक्रिस्टलीय ठोस (Amorphous Solids)
(2) क्रिस्टलीय ठोस (Crystalline Solids)
- क्रिस्टलीय ठोस (Crystalline Solids)
क्रिस्टलीय ठोस (crystalline solids) साधारणत: छोटे-छोटे (लघु (small)) क्रिस्टलों की अत्यधिक संख्यां (large number) से बना होता है।
क्रिस्टलीय ठोस के प्रत्येक लघु क्रिस्टलों का विशेष (अभिलाक्षणिक) geometrical shape (ज्यामितीय आकार) होता है।
क्रिस्टल में constituent particles (अवयवी कणों) का क्रम सुव्यवस्थित होता है।
क्रिस्टल में दीर्घ परासी व्यवस्था (Long range order) होती है। अर्थात कणों की व्यवस्था का pattern नियमित होता है, तथा इस व्यवस्था की पुनरावृति संपूर्ण क्रिस्टल में एक से अंतराल पर होती है।
क्रिस्टलीय ठोस के उदारण: Sodium chloride (सोडियम क्लोराइड) तथा Quartz (क्वार्टज) crystalline solid के विशिष्ट उदाहरण हैं। सभी Metallic तथा Non-metallic solids यथा लोहा, सोना, चाँदी, ताम्बा, सल्फर, फास्फोरस, जिंक सल्फाइड, नैफ्थैलीन आदि क्रिस्टलीय ठोस हैं।
क्रिस्टलीय ठोस के गुण (Properties of Crystalline Solids)
क्रिस्टलीय ठोस का melting point (गलनांक) निश्चित होता है।
क्रिस्टलीय ठोस Anisotropic (विषमदैशिक) होते हैं। अर्थात उनके कुछ physical properties (भौतिक गुणों), यथा electrical resistance (विद्युत प्रतिरोधकता), refractive index (अपवर्तनांक), आदि भिन्न भिन्न दिशाओं में भिन्न भिन्न होते हैं। ऐसा भिन्न भिन्न दिशाओं में क्रिस्टलीय ठोस के अलग अलग व्यवस्था के कारण होता है।
क्रिस्टलीय ठोस को तेज धार वाले औजार से काटने पर इसके दो भागों में विभक्त टुकड़ों की सतहें सपाट तथा चिकनी होती हैं।
क्रिस्टलीय ठोस का heat of fusion ( गलन की उष्मा ) निश्चित तथा अभिलाक्षणिक होती है।
क्रिस्टलीय ठोस वास्तविक ठोस पदार्थ होते हैं।
अक्रिस्टलीय ठोस (Amorphous Solids)
अमोरफस एक ग्रीक शब्द है, जिसका अर्थ “आकृति नहीं होना” होता है। स्पष्टत: अक्रिस्टलीय ठोस (Amorphous solids) असमान आकृति वाले (असमाकृति (Irregular shape)) कणों से बने होते हैं।
अक्रिस्टलीय ठोस के अवयवी कणों (Constituent particles) (atoms, molecules or ions) की व्यवस्था केवल लघु परासी व्यवस्था (Short range order) होती है।
लघु परासी व्यवस्था (Short range order) में नियमित और आवृति पैटर्न केवल अल्प दूरियों तक ही देखा जाता है। अर्थात अक्रिस्टलीय ठोस के अवयवी कणों की नियमित तथा आवृति पैटर्न केवल अल्प दूरियों तक ही देखा जाता है। ऐसे भाग बिखरे होती हैं तथा इनके बीच व्यवस्था क्रम अनियमित होते हैं।
क्वार्टज काँच, रबर, प्लास्टिक, आदि अक्रिस्टलीय ठोस के कुछ विशिष्ट उदाहरण हैं।
क्रिस्टलीय ठोस तथा अक्रिस्टलीय ठोस के गुण उनके अवयवी कणों के व्यवस्था में अंतर के कारण भिन्न भिन्न होते हैं।
अक्रिस्टलीय ठोस (Amorphous solids) के गुण
Amorphous solid ताप के एक निश्चित परास (A range of temperature) पर नरम हो जाते है, इसी कारण Amorphous solid (अक्रिस्टलीय ठोस) को गलाकर साँचे में ढ़ाला जा सकता है, जैसे कि प्लास्टिक, काँच, आदि।
गर्म करने पर एक निश्चित ताप पर Amorphous solid क्रिस्टलीय बन जाते हैं। अक्रिस्टलीय ठोस के क्रिस्टलीय बन जाने के कारण ही प्राचीन सभ्यता की कुछ काँच के बने वस्तुओं में दुधियापन पाया जाता है।
अक्रिस्टलीय पदार्थ में तरल की भाँति प्रवाह प्रवृति होती है। हालाँकि अक्रिस्टलीय ठोस में प्रवाह की प्रवृति बहुत ही slow होती है। अक्रिस्टलीय पदार्थ के प्रवाह की प्रवृति के कारण ही बहुत पुराने इमारतों के खिड़कियों आदि में लगे काँच की जड़े ऊपर की अपेक्षा थोड़ा मोटे हो जाते हैं।
अक्रिस्टलीय ठोस की प्रकृति Isotropic (समदैशिक) होती है, क्योंकि उनमें दीर्घ परासी व्यवस्था (long range order) नहीं होती है, तथा सभी दिशाओं में irregular (अनियमित) arrangement (विन्यास) होता है।
अक्रिस्टलीय ठोस दैनिक जीवन में काफी उपयोगी हैं, यथा silicon, जो कि एक अक्रिस्टलीय ठोस है, सूर्य के प्रकाश के विद्युत रूपांतरण करने के लिए उपलब्ध श्रेष्टतम photovoltaic पदार्थ है।
क्रिस्टलीयतथाअक्रिस्टलीयठोसकेगुणोंमेंअंतर |
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गुण |
क्रिस्टलीयठोस |
अक्रिस्टलीयठोस |
आकार |
निश्चितअभिलाक्षणिकआकार |
असमाकृतिआकार |
गलनांक (Melting point) |
निश्चितऔरअभिलाक्षणिकतापपरपिघलतेहैं। |
तापकेएकपरासमेंधीरे–धीरेनरमपड़तेहैं। (Soften over a range of temperature) |
विदलनगुण (Cleavage property) |
तेजधारवालेऔजारसेकाटनेपरप्राप्तटुकड़ोंकीसतहेंसपाटऔरचिकनीहोतीहैं। |
तेजधारवालेऔजारसेकाटनेपरप्राप्तटुकड़ोंकीसतहेअनियमिततथारूखड़ीहोतीहैं। |
गलनकीउष्मा (Heat of fusion) |
गलनकीउष्मानिश्चितऔरअभिलाक्षणिकहोतीहै। |
गलनकीउष्मानिश्चितनहींहोतीहै। |
दैशिकता (Anisotropy) |
विषमदैशिक (Anisotropic) प्रकृतिकेहोतेहैं। |
समदैशिक (Isotropic) प्रकृतिकेहोतेहैं। |
अवयवीकणोंकीव्यवस्थामेंक्रम |
दीर्घपरासीव्यवस्था (Long range order) |
केवललघुपरासीव्यवस्था (Only short range order) |
क्रिस्टलीय ठोसों का वर्गीकरण (Classification of Crystalline Solids)
क्रिस्टलीय ठोसों को उनमें परिचालित अंतराण्विक बलों (operating intermolecular forces) के आधार पर चार भागों में बाँटा जा सकता है। ये हैं: आण्विक ठोस (Molecular Solids), आयनिक ठोस (Ionic solids), धात्विक ठोस (Metallic solids) तथा सहसंयोजक ठोस (Covalent or Network solids)।
(1) आण्विक ठोस (Molecular Solids)
वैसे क्रिस्टलीय ठोस जिनके अवयवी कण अणु (Molecule) होते हैं, को आण्विक ठोस (Molecular Solid) कहा जाता है। Molecular solids को पुन: तीन भागों में बाँटा जा सकता है। ये हैं: अध्रुवी आण्विक ठोस (Non-polar Molecular solids), ध्रुवीय आण्विक ठोस (Polar Molecular Solids), तथा हाइड्रोजन आबंधित आण्विक ठोस (Hydrogen bonded Molecular Solids)।
(क) अध्रुवी आण्विक ठोस (Non-polar Molecular solids)
परमाणुओं, यथा निम्न ताप पर आर्गन और हीलियम अथवा Non-polar bond से बने अणुओं, यथा निम्न ताप पर H2, Cl2 और I2 द्वारा बने ठोस को अध्रुवीय आण्विक ठोस कहा जाता है।
अध्रुवीय ठोस के परमाणु अथवा अणु Weak Dispersion Forces (दुर्बल परिक्षेपण बलों) या London Forces (लंडन बलों) द्वारा बँधे रहते हैं।
अध्रुवीय ठोस के गलनांक निम्न होते हैं तथा ये सामान्यत: कमरे के ताप और दाब पर द्रव अथवा गैसीय अवस्था में रहते हैं।
(ख) ध्रुवीय आण्विक ठोस (Polar Molecular Solids)
वैसे क्रिस्टलीय ठोस जिनके अणु अपेक्षाकृत प्रबल dipole-dipole interactions (द्विध्रुव-द्विध्रुव अन्योन्यक्रियाओं) द्वारा एक दूसरे से बंधे होते हैं, ध्रुवीय आण्विक ठोस (Polar Molecular Solids) कहलाते हैं। यथा HCl, SO2, SO2, NH3 आदि पदार्थ के अणु ध्रुवीय सहसंयोजक बंधों से बने होते हैं, अत: ये ध्रुवीय आण्विक ठोस कहलाते हैं।
ध्रुवीय आण्विक ठोस के melting point (गलनांक) अध्रुवीय आण्विक ठोस से अधिक होते हैं, फिर भी इनमें से अधिकतर कमरे के ताप और दाब पर गैस अथवा द्रव होते हैं।
(ग) हाइड्रोजन आबंधित आण्विक ठोस (Hydrogen bonded Molecular Solids)
ऐसे क्रिस्टलीय ठोस, जिनके अणुओं में H, और F, O अथवा N परमाणुओं के मध्य ध्रुवीय-सहसंयोजक बंध होते हैं, को हाइड्रोजन आबंधित आण्विक ठोस कहलाते हैं। ऐसे ठोस के अणुओं को प्रबल हाइड्रोजन आबंधन बंधित करते हैं, जैसे कि H2O (बर्फ)। हाइड्रोजन आबंधित आण्विक ठोस विद्युत के अचालक होते हैं। सामान्यत: यह कमरे के ताप और दाब पर वाष्पशील द्रव अथवा मुलायम ठोस होते हैं।
(2) आयनिक ठोस (Ionic Solids)
वैसे ठोस जिनके Constituent particles (अवयवी कण) आयन होते हैं, आयनिक ठोस (Ionic Solid) कहलाते हैं।
आयनिक ठोसों (Ionic Solids) का निर्माण positively charged ions [Anions (धनायनों)] तथा negatively charged ions [Cations (ऋणायनों)] के three dimensional (त्रिआयामी) विन्यासों में strong स्थिर वैद्युत (कूलॉमी) बलों से बंधने पर होता है।
आयनिक ठोस कठोर और भंगुर प्रकृति के होते हैं।
आयनिक ठोस के Melting point (गलनांक) और Boiling point (क्वथनांक) उच्च होते हैं। चूँकि आयनिक ठोस में आयन गमन के लिए स्वतंत्र नहीं होते हैं, अत: ये ठोस अवस्था में विद्युतरोधी होते हैं। आयनिक ठोस गलित अवस्था में अथवा जल में घोलने पर, आयन गमन के लिए मुक्त हो जाते हैं तथा वे विद्युत का संचालन करते हैं। अर्थात आयनिक ठोस, ठोस अवस्था में विद्युत के कुचालक तथा गलित अवस्था तथा जल के विलयन में विद्युत के सुचालक होते हैं।
(3) धात्विक ठोस (Metallic Solid)
धातु, धात्विक ठोस कहलाते हैं। धात्विक ठोस के अवयवी कण धनायन होते हैं। वास्तव में धातुएं मुक्त इलेक्ट्रॉन से धिरे और उनके द्वारा संलग्नित धनायनों का व्यवस्थित संग्रह हैं। ये इलेक्ट्रॉन निरंतर गतिशील होते हैं तथा क्रिस्टल में सर्वत्र समरूप से विस्तारित होते हैं।
धात्विक ठोस के ये मुक्त और गतिशील इलेक्ट्रॉन ही धातुओं की उच्च वैद्युत और उष्मीय चालकता के लिये उत्तरदायी होते हैं। जब धातुओं में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो ये इलेक्ट्रॉन धनायनों के नेटवर्क में सतत प्रवाह करते हैं तथा विद्युत धारा प्रवाहित होने लगती है। उसी प्रकार धातु के एक भाग में उष्मा प्रदान की जाती है तो इसमें वर्तमान मुक्त तथा गतिशील इलेक्ट्रॉन उस उष्मीय उर्जा को धातु के पूरे भाग में समान रूप से विस्तारित कर देती है।
धातुओं की विशेष चमक भी उनमें उपस्थित मुक्त तथा गतिशील इलेक्ट्रॉन के कारण ही होती हैं। धातुएँ अत्यधिक अधातवर्धनीय (malleable) तथा तन्य (ductile) होती हैं।
(4) सहसंयोजक अथवा नेटवर्क ठोस (Covalent or Network Solids)
अधात्विक क्रिस्टलीय ठोस, जिनके संपूर्ण क्रिस्टल में निकटवर्ती परमाणुओं के बीच सहसंयोजक बंध बनने के कारण विस्तृत अनेकरूपता होती है, सहसंयोजक अथवा नेटवर्क ठोस कहलाते हैं।
सहसंयोजक अथवा नेटवर्क ठोस (Covalent or Netwok solids) को Giant Molecule (विशाल अणु) भी कहा जाता है।
सहसंयोजक अथवा नेटवर्क ठोस (Covalent or Netwok solids) के परमाणुओं के बीच सहसंयोजक बंध दिशात्मक (Directional) प्रकृति के होते हैं, इसलिये परमाणु अपनी स्थितिओं पर अति प्रबलता से संलग्न रहते हैं।
सहसंयोजक अथवा नेटवर्क ठोस (Covalent or Netwok solids) के गुण
सहसंयोजक अथवा नेटवर्क ठोस (Covalent or Netwok solids) अति कठोर तथा भंगुर होते हैं।
सहसंयोजक अथवा नेटवर्क ठोस (Covalent or Netwok solids) का Melting point (गलनांक) काफी उच्च होता है तथा ये गलन से पूर्व विघटित भी हो सकते हैं।
सहसंयोजक अथवा नेटवर्क ठोस (Covalent or Netwok solids) विद्युतरोधी होते हैं, अर्थात विद्युत का संचालन नहीं करते हैं।
Diamond (हीरा) तथा Silicon carbide (सिलिकॉन कार्बाइड) सहसंयोजक अथवा नेटवर्क ठोस (Covalent or Netwok solids) का एक विशिष्ट उदाहरण है।
ग्रेफाइट भी सहसंयोजक अथवा नेटवर्क ठोस (Covalent or Netwok solids) का एक उदाहरण है, परंतु अपवाद स्वरूप ग्रेफाइट मुलायम तथा विद्युत का सुचालक है। ग्रेफाइट का यह अपवादी गुण उसकी विशिष्ट संरचना के कारण होता है।
विभिन्नप्रकारकेक्रिस्टलीयठोसकेगुण |
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ठोसकेप्रकार |
अवयवीकण |
बंधनआकर्षणबल |
उदारण |
भौतिकप्रकृति |
वैद्युतचालकता |
गलनांक |
(1) आण्विकठोस |
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(i) अध्रुवी |
अणु |
परिक्षेपणअथवालंडनबल |
Ar, CCl4, H2, I2, CO2 |
मुलायम |
विद्युतरोधी |
अत्यधिकनिम्न |
(ii)ध्रुवीय |
अणु |
द्विध्रुव–द्विध्रुवअन्योन्यक्रिया |
HCl, SO2 |
मुलायम |
विद्युतरोधी |
निम्न |
(iii) हाइड्रोजनआबंधित |
अणु |
हाइड्रोजनआबंध |
H2O (बर्फ) |
कठोर |
विद्युतरोधी |
निम्न |
(2) आयनिकठोस |
आयन |
कूलॉमीअथवास्थिरवैद्युत |
NaCl, MgO, ZnS, CaF2 |
कठोरपरंतुभंगुर |
ठोसअवस्थामेंविद्युतरोधीपरंतुगलितअवस्थातथाजलीयविलयनमेंविद्युतचालक |
उच्च |
(3) धात्विकठोस |
विस्थानीकृतइलेक्ट्रॉनकेसमुद्रमेंधनायन |
धात्विकआबंध |
Fe, Cu, Ag, Mg |
कठोरपरंतुअघातवर्ध्यऔरतन्य |
विद्युतचालक |
साधारणउच्च |
(4)सहसंयोजकअथवानेटवर्कठोस |
परमाणु |
सहसंयोजकआबंध |
SiO2(क्वार्टज), SiC, C (हीरा), AlN, C(ग्रेफाइट) |
कठोर, परंतुग्रेफाइटमुलायमहै (अपवाद) |
विद्युतरोधी, परंतुग्रेफाइटविद्युतकाचालकहै (अपवाद) |
अत्यधिकउच्च |
क्रिस्टल जालक और एकक कोष्टिका
क्रिस्टलीय ठोस का मुख्य अभिलक्षण उसके Constituent Particles (अवयवी कणों) का Regular (नियमित) और repeating (पुनरावृत) पैटर्न है।
जब क्रिस्टल के अवयवी कणों का three dimensional (त्रिविमीय) arrangement (व्यवस्था) का आरेखन तथा उसमें प्रत्येक कण का बिन्दु द्वारा चित्रण को क्रिस्टल जालक (Crystal Lattice) कहा जाता है।
दूसरे शब्दों में, Crystall (क्रिस्टल) का स्पेस (space) में बिन्दुओं की three dimensional (त्रिविमीय) arrangement (व्यवस्था) क्रिस्टल जालक (Crystal Lattice) कहलाती है।
क्रिस्टलीय जालक को Bravais Lattices (ब्रेवे जालक) भी कहा जाता है। क्रिस्टलीय जालक का नाम फांसिसी गणितज्ञ Augute Bravais के नाम पर Bravais Lattices पड़ा, जिन्होंने सर्वप्रथम इसके बारे में बतलाया था।
Crystal Lattice का Characteristics (अभिलक्षण)
(क) Lattice का प्रत्येक बिन्दु Lattice point (जालक बिन्दु) या Lattice site (जालक स्थल) कहलाता है।
(ख) Lattice (जालक) का प्रत्येक point (बिन्दु) एक constituent particle (अवयवी कण) को निरूपित करता है। ये constituent particle एक परमाणु (Atom), अणु (Molecule) या एक आयन (ion) हो सकते हैं।
(ग) Lattice point को सीधी रेखाओं द्वारा जोड़ा जाता है जिससे कि Lattice के geometry (जालक की ज्यामिति) व्यक्त की जा सके।
एकक कोशिका (Lattice Cell)
Lattice का लघुतम भाग को Lattice cell कहा जाता है। जब Lattice cell को विभिन्न दिशाओं में पुनरावृत किया जाता है, तो पूर्ण Lattice (जालक) की उत्पत्ति होती है।
Lattice Cell का Characteristic (अभिलक्षण)
(क) Lattice Cell के तीन किनारों के dimensions को प्राय: और के द्वारा दर्शाया जाता है, जो कि परस्पर लंबबत हो भी सकते हैं, अथवा नहीं भी।
(ख) Lattice cell के किनारों के मध्य कोण को ( और के मध्य), ( और के मध्य) और ( और के मध्य) द्वारा दर्शाया जाता है।
इस तरह एक Lattice cell छ: parameter (मानक) और द्वारा अभिलक्षणित होती है।
आद्य एवं केन्द्रित एकक कोष्ठिका (Primitive and Centered Unit Cell)
Lattice के Unit cell को दो भागों में बाँटा जा सकता है: आद्य एकक कोष्ठिका (Primitive Unit cell) तथा केन्द्रित एकक कोष्ठिका (Centered Unit Cells).
(1) आद्य एकक कोष्ठिका (Primitive Unit cell)
वैसे Lattice जिनके Unit cell (एकक कोष्ठिका) के constituent particles (अवयवी कण) केवल corner position (कोनों पर) उपस्थित हों, तो उसे Primitive Unit Cell (आद्य एकक कोष्ठिका) कहा जाता है।
(2) केन्द्रित एकक कोष्ठिका (Centered Unit Cell)
Lattice के वैसे Unit cell (एकक कोष्ठिका) जिनमें Constituent particles (अवयवी कण) कोनों के अतिरिक्त अन्य स्थितियों पर भी उपस्थित होते हैं, केन्द्रित एकक कोष्ठिका (Centered Unit Cell) क़हलाते हैं।
केन्द्रित एकक कोष्ठिका (Centered Unit Cell) के प्रकार
केन्द्रित एकक कोष्ठिका (Centered Unit Cell) तीन प्रकार के होते हैं:
(a) अंत: क्रेन्द्रित एकक कोष्ठिका (Body centered Unit Cells): वैसे Unit cells जिनमें एक Constituent particle (अवयवी कण) कोनों में उपस्थित कणों के अतिरिक्त उसके अंत: केन्द्र (body center) में होता है, अंत: क्रेन्द्रित एकक कोष्ठिका (Body centered Unit Cells) कहलाता है।
(b) फलक केन्द्रित एकक कोष्ठिका (Face centered Unit cells): वैसे Unit cells जिनमें कोनों में उपस्थित अवयवी कणों के अतिरिक्त एक Constituent particle (अवयवी कण) प्रत्येक फलक (Face) के केन्द्र पर भी होता है, फलक केन्द्रित एकक कोष्ठिका (Face centered Unit cells) कहलाता है।
(c) अंत्य केन्द्रित एकक कोष्ठिका (End centered Unit Cells): वैसे Unit cells जिनमें कोनों पर उपस्थित अवयवी कणों (Constituent particles) के अतिरिक्त एक अवयवी कण किन्हीं दो विपरीत फलकों (Face) के सेंटर में पाया जाता है, अंत्य केन्द्रित एकक कोष्ठिका (End centered Unit Cells) कहलाते हैं।
कुल मिलाकर Primitive Unit Cells (आद्य एकक कोष्ठिकाएं) सात प्रकार की होती हैं: ये हैं, घनीय (Cubic), द्विसमलंबाक्ष (Tetragonal), विषमलंबाक्ष (Orthorhombic), षटकोणीय (Hexagonal), त्रिसमनताक्ष (Rhombohedral), एकनताक्ष (Monoclinic) तथा त्रिनताक्ष (Triclinic) .
सातआद्यकोष्टिकाएंऔरकेन्द्रितसेलोंकेरूपमेंउनकीसंभवविविधताएं |
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क्रिस्टलसिस्टम |
संभवविविधताएं |
अक्षीयदूरियाँयाकोरलंबाई |
अक्षीयकोण |
उदाहरण |
घनीय (Cubic) |
आद्य, अंत: केन्द्रित, फलककेन्द्रित |
a=b=c |
NaCl, जिंकब्लेंड, Cu |
|
द्विसमलंबाक्ष (Tetragonal) |
आद्य, अंत: केन्द्रित |
a=b≠ca=b≠c |
α=β=γ=90oα=β=γ=90o |
श्वेतटिन,SnO2,TiO2,CaSO4SnO2,TiO2,CaSO4 |
विषमलंबाक्ष (Orthorhombic) |
आद्य, अंत: केन्द्रित, फलककेन्द्रित, अंत्यकेन्द्रित |
a≠b≠ca≠b≠c |
α=β=γ=90oα=β=γ=90o |
विषमलंबाक्षगंधक,KNO3,BaSO4KNO3,BaSO4 |
षटकोणीय (Hexagonal) |
आद्य |
a=b≠ca=b≠c |
α=β=90oα=β=90o, γ=120oγ=120o |
graphite, ZnO, CdS |
त्रिसमनताक्षयात्रिकोणी (Rhombohedral) |
आद्य |
a=b=ca=b=c |
α=β=y≠90oα=β=y≠90o |
कैलसाइट(CaCO3CaCO3), सिनबार (HgS) |
एकनताक्ष (Monoclinic) |
आद्य, अंत्यकेन्द्रित |
a≠b≠ca≠b≠c |
α=γ=90oα=γ=90o, β≠120oβ≠120o |
एकनताक्षगंधक,Na2SO4⋅10H2ONa2SO4⋅10H2O |
त्रिनताक्ष (Triclinic) |
आद्य |
a≠b≠ca≠b≠c |
α≠β≠γ≠90oα≠β≠γ≠90o |
K2Cr2O7,CuSO4⋅5H2O,H3BO3 |
तीन घनीय जालक (Cubic Lattices)14 पकार के Bravais Lattice (ब्रेवे जालक) एकक कोष्ठिकाएं
सभी भुजाएं समान एवं सभी फलकों के मध्य कोण
दो द्विसमलंबाक्ष जालक (Two Tetragonal Lattices)
लंबाई में एक भुजा अन्य दो से भिन्न एवं सभी फलकों के मध्य कोण
चार विषमलंबाक्ष जालक (Four Orthorhombic Lattices)
असमान भुजाएं; सभी फलकों के मध्य कोण
दो एकनताक्ष जालक (Two Monoclinic lattices )
असमान भुजाएं एवं दो फलकों के मध्य कोण से भिन्न है।
षटकोणीय जालक (Hexagonal Lattice)
एक भुजा लंबाई में अन्य दो से भिन्न, दो फलकों पर चिन्हित कोण है।
त्रिसमनताक्ष जालक (Rhombohedral Lattice)
सभी भुजाएं समान लंबाई, दो फलकों पर कोण से कम है।
त्रिनताक्ष जालक (Triclinic Lattice)
असमान भुजाएं ; A, B, C असमान कोण हैं, जिनमें से कोई भी का नहीं है।
एक एकक कोष्ठिका में अवयवी कणों की संख्या (Number of Atoms in a Unit Cell)
आद्य घनीय एकक कोष्ठिका में अवयवी कणों की संख्यां (Number of constituent particles in Primitive Cubic Cell)
Primitive Cubic Cell (आद्य घनीय एकक कोष्ठिका) में अवयवी कण यथा परमाणु केवल कोनों पर होते हैं। कोनों का प्रत्येक परमाणु आठ निकटवर्ती एकक कोष्ठिकाओं (Primitive Cubic Cell) के मध्य सहभाजित होता है। चार एकक कोष्ठिकाएं समान परत में और चार एकक कोष्ठिकाएं उपरी परत की होती हैं।
अत: एक परमाणु (अथवा अणु अथवा आयन) का वां भाग एक विशिष्ट एकक कोष्ठिका से संबंधित रहता है।
चूँकि कुल मिलाकर प्रत्येक घनीय एकक कोष्ठिका में उसके कोनों पर 8 परमाणु हैं, अत: एक एकक कोष्ठिका में परमाणुओं की कुल संख्यां परमाणु होगी।
चित्र (क) में प्रत्येक गोला, उपस्थित कण के केवल केन्द्र को निरूपित करता है।
चित्र (ख) एकक कोष्ठिका के दिकस्थान भराव निरूपण को कणों के वास्तविक आकार के साथ दिखलाता है।
चित्र (ग) एक घनीय एकक कोष्ठिका में उपस्थित विभिन्न परमाणुओं के वास्तविक भागों को दर्शाता है।
अंत: केन्द्रित घनीय एकक कोष्ठिका (Body Centered Cubic Cell (bcc))
एक अंत: केन्द्रित घनीय (bcc) एकक कोष्ठिका में एक परमाणु उसके प्रत्येक कोने पर और इसके अतिरिक्त परमाणु उसके अंत: केन्द्र में भी होता है।
अत: (i) 8 कोने प्रति कोना परमाणु परमाणु
(ii) 1 अंत: केन्द्र परमाणु परमाणु
अत: प्रति एकक कोष्ठिका में परमाणुओं की कुल संख्यां = 2 परमाणु
फलक केन्द्रित घनीय एकक कोष्ठिका (Face Centered Cubic (fcc) Unit Cell )
फलक केन्द्रित घनीय (fcc) एकक कोष्ठिका में परमाणु सभी कोनों पर और घन के सभी फलकों के केन्द्रों पर पाए जाते हैं।
फलक केन्द्रित घनीय (fcc) एकक कोष्ठिका में प्रत्येक फलक के केन्द्र पर उपस्थित परमाणु दो सन्निकट कोष्ठिकाओं के मध्य सहभाजित होता है तथा प्रत्येक परमाणु का केवल भाग एक एकक कोष्ठिका में सम्मिलित होता है।
अत: फलक केन्द्रित घनीय (fcc) एकक कोष्ठिका में परमाणुओं की संख्यां
(i) 8 कोने के परमाणु × परमाणु प्रति एकक कोष्ठिका परमाणु
(ii) 6 फलक केन्द्रित परमाणु परमाणु प्रति एकक कोष्ठिका परमाणु
अत: फलक केन्द्रित घनीय (fcc) एकक कोष्ठिका में परमाणुओं की कुल संख्यां परमाणु
निविड संकुलित संरचनाएं
ठोसों में उनके Constituent particles (अवयवी कण) Close packed (निविड संकुलित) होते हैं तथा अवयवी कणों के बीच न्यूनतम स्थान रिक्त होता है।
ठोसों के अवयवी कणों की packing व्यवस्था एक विमा (One dimension), द्विविमा (two dimension) तथा त्रिविमा (three dimension) में निम्नांकित तरह की होती है।
(क) एक विमा में निविड संकुलन (Close Packing in One Dimension)
एक विमा में ठोसों के अवयवी कणों की Close packing (निविड संकुलन) की केवल एक विधि हो सकती है।
इसमें ठोसों के अवयवी कणों को एक पंक्ति में एक दूसरे से स्पर्श करते हुए व्यवस्थित किया जाता है। इस व्यवस्था में, ठोस के अवयवी कण, जो गोले की आकृति में होते हैं, का प्रत्येक गोला दो निकटवर्ती गोलों के संपर्क में रहता है।
एक कण के निकटतम गोलों की संख्यां को उसका Coordination number (उपसंयोजन संख्यां) कहा जाता है।
इस प्रकार One dimensional close packing (एकविमीय निविड़ संकुलित) में Coordination number (उपसंयोजन संख्यां) दो है होती है।
द्विविमा में निविड संकुलन (Close Packing in Two Dimensions)
Two dimension (द्विविमा) में ठोसों के अवयवी कणों की Close packing (निविड संकुलित) संरचना गोलों की पंक्तियों को एक साथ एक के ऊपर एक रखकर निम्नांकित दो तरीकों से की जा सकती है।
(क) Square Close Packing in Two Dimension (द्विविम में वर्ग निविड़ संकुलन)
गोलों की एक पंक्ति के ऊपर दूसरी पंक्ति के संपर्क को इस प्रकार रखा जा सकता है कि द्वितीय पंक्ति के गोले प्रथम पंक्ति के गोलों के ठीक ऊपर हों एवं दोनों पंक्तियों के गोले horizontal (क्षैतिजीय) तथा vertical (उर्ध्वाकार) रूप से रखे गये (संरेखित) हों।
इस तरह यदि गोलों के प्रथम पंक्ति की व्यवस्था को A प्रकार की व्यवस्था कहा जाये तो दूसरी पंक्ति भी ठीक समान होने के कारण उसे भी A प्रकार की व्यवस्था कहा जायेगा। अत: यह व्यवस्था दो से ज्यादा पंक्ति रखे जाने से AAA प्रकार की प्राप्त की जा सकती है।
स्पष्टत: इस प्रकार की व्यवस्था अर्थात द्विविमा में निविड संकुलन (Close packing in two dimension) AAA प्रकार में, प्रत्येक गोला निकटवर्ती चार गोलों के संपर्क में रहता है, अत: इस स्थिति में द्विविमीय उपसंयोजन संख्यां (Two dimensional Coordination Number) चार है।
इस AAA प्रकार की व्यवस्था को Square Close Packing in Two Dimension (द्विविम में वर्ग निविड संकुलन) कहा जाता है।
(ख) Two Dimensional Hexagonal Close Packing (द्विविम षटकोणीय निविड संकुलन)
ठोसो की दूसरे पंक्ति को प्रथम पंक्ति के ऊपर इस प्रकार रखा जा सकता है उसके गोले प्रथम पंक्ति के गोलों के ठीक (पूरी तरह) Depressions (अवनमनों) में आ जाएं।
इस तरह यदि प्रथम पंक्ति को A तथा दूसरी पंक्ति को B कहा जा सकता है, चूँकि दोनों पंक्तियों की व्यवस्था भिन्न हैं।
अत: दो से ज्यादा पंक्तियों इस व्यवस्था के तहत रखने पर Two dimensional में ठोसों के अवयवी कणों के पंक्तियों की ABAB व्यवस्था प्राप्त होती है।
इस स्थिति में ठोस के अवयवी कण अर्थात प्रत्येक गोला निकटवर्ती छ: गोलों के संपर्क में रहता है, अत: इस स्थिति में द्विविमीय उपसहसंयोजन संख्यां (Two dimensional Coordination Number) छ: है।
इस ABAB व्यवस्था में छ: गोलों का केन्द्र सम षटकोण (Regular hexagon) के कोनों पर है।
ठोस के अवयवी कणों की यह व्यवस्था को Two Dimensional Hexagonal Close Packing (द्विविम षटकोणीय निविड़ संकुलन) कहा जाता है।
Two Dimensional Hexagonal Close Packing (द्विविम षटकोणीय निविड संकुलन) व्यवस्था में (चित्र में) देखा जा सकता है कि गोलों (अवयवी कणों) के बीच कुछ खाली स्थान अर्थात रिक्तियाँ (voids) है, जिनकी आकृति त्रिभुजाकार या त्रिकोणीय हैं। ये त्रिकोणीय आकार की रिक्तियाँ दो प्रकार की हैं। एक पंक्ति में त्रिकोण का शीर्ष ऊपर की ओर तथा दूसरी पंक्ति में त्रिकोण का शीर्ष नीचे की ओर है।
त्रिविमा में निविड संकुलन (close packing in three dimension)
Three dimension में क्लोज पैकिंग दो तरह से प्राप्त की जा सकती है।
(क) द्विविम वर्ग निविड संकुलित परतों से त्रिविम निविड संकुलन (Three dimensional close packing from two dimensional square close packed layers):
घनीय निविड संकुलित परतों की पहली लाईन के ठीक ऊपर दूसरी परत रखकर तथा ठीक इन परतों के क्षैतिज दूसरी परतों को रखकर त्रिविमा में निविड संकुलन प्राप्त किया जा सकता है।
अर्थात AAAAA . . . . टाईप लेयर बनाकर। इस व्यवस्था अर्थात को चित्र में दर्शाया गया है। इस प्रकार प्राप्त होने वाला जालक सामान्य घनीय जालक है। इसकी एकक कोष्ठिका आद्य घनीय एकक कोष्ठिका है, जिसे चित्र में लाल रंग से दर्शाया गया है।
(ख) द्विविम षटकोणीय निविड संकुलित परतों से त्रिविम निविड संकुलन (Three dimensional close packing from two dimensional hexagonal close packed layers):
द्विविम षटकोणीय निविड संकुलित परतों से त्रिविम निविड संकुलन दो तरह से प्राप्त किया जा सकता है:
(i) द्वितीय परत को प्रथम परत के ऊपर रखकर
प्रथम परत को द्वितीय परत पर इस प्रकार रखा जाता है कि द्वितीय परत के गोले प्रथम परतों के अवनमनों में आ जाएं। अर्थात ABAB व्यवस्था का त्रिविम प्राप्त किया जाता है।
इसमें दो प्रकार की व्यवस्था उत्पन्न होती है।
पहली जब भी द्वितीय परत का एक गोला प्रथम परत की रिक्ति के ऊपर अथवा नीचे होता है तो एक चतुष्फलकीय रिक्ति उत्पन्न होती है। इस प्रकार बने रिक्तियों को चतुष्फलकीय रिक्तियाँ (Tetrahedral voids) कहते हैं।
दूसरा दूसरे परत की त्रिकोणीय रिक्तियाँ, प्रथम परत की त्रिकोणीय रिक्तियों के ऊपर होती हैं, जिससे दो दो त्रिकोणीय रिक्तियाँ एक ऊपर की ओर शीर्ष वाला तथा दूसरी नीचे की ओर शीर्ष वाला बनता है।
इस प्रकार की रिक्तियों को अष्टफलकीय रिक्तियाँ (Octahedral voids) कहते हैं।
चित्र में चतुष्फलक रिक्तियों को T से तथा अष्टफलक रिक्तियों को O से दर्शाया गया है।
रिक्तियों की संख्यां (Number of voids)
चतुष्फलक (tetrahedral) तथा अष्टफलक (octahedral) रिक्तियों की संख्यां क्लोज पैक्ड (निविड संकुलित) गोलों की संख्या पर निर्भर करती है।
मान लिया कि निविड संकुलित गोलों की संख्यां = N
तो, इस व्यवस्था में प्राप्त चतुष्फलक रिक्तियों की संख्या = 2N
तथा अष्टफलक रिक्तियों की संख्या = N
(ii) तृतीय परत को द्वितीय परत पर रखना
तृतीय परत को द्वितीय परत पर रखने पर दो संभावनाएँ होती हैं।
(क) चतुष्फलकीय रिक्तियों का आच्छादन (Covering of Tetrahedral Voids) :
द्वितीय परत की चतुष्फलकीय रिक्तियों को तृतीय परत को प्रथम परत के गोलों पर संरेखित रखकर आच्छादित किया जा सकता है। इस व्यवस्था में गोलों के पैटर्न एकांतर पैटर्न में पुनरावृत होता है तथा ABAB . . . पैटर्न प्राप्त होता है। इस संरचना को षटकोणीय निविड संकुलित (Hexagonal close packing [hcp]) कहा जाता है।
इस प्रकार की परमाणुओं की व्यवस्था कई धातुओं, जैसे मैग्नीशियम और जिंक में पाई जाती है।
(ख) अष्टफलकीय रिक्तियों का आच्छादन (Covering Octahedral Voids):
तीसरी परत दूसरी परत के ऊपर इस प्रकार रख सकते हैं कि उसके गोले अष्टफलकीय रिक्तियों को आच्छादित करते हों। इस व्यवस्था में तीसरी परत के गोले प्रथम अथवा द्वितीय किसी भी परत के साथ संरेखित नहीं होते हैं। इस व्यवस्था को यदि C कहा जाय तो ABCABC . . . व्यवस्था प्राप्त होती है। इस प्रकार प्राप्त संरचना को फलक केन्द्रित घनीय [fcc (face centered cubic)] अथवा घनीय निविड संकुलित [cubic close packing (ccp)] संरचना कहा जाता है।
इस प्रकार की संरचना धातुओं, जैसे ताँबा तथा चाँदी में पाया जाता है।
ये दोनों प्रकार के क्लोज पैकिंग अति उच्च क्षमता वाले होते हैं और क्रिस्टल का 74% स्थान संपूरित रहता है। इन दोनों में, प्रत्येक गोला बारह गोलों के संपर्क में रहता है, अत: इन दोनों संरचनाओं में उपसंयोजन संख्या 12 होती है।
संकुलन क्षमता
ठोसों के अवयवी कणों (atoms, molecules or ions) के किसी भी प्रकार संकुलित होने की स्थिति में भी कुछ स्थान रिक्त रह जाता है।
कुल उपलब्ध स्थान का वह प्रतिशत जो कणों द्वारा संपूरित होता है, संकुलन क्षमता (Packing Efficiency) कहलाता है।
hcp और ccp संरचनाओं में संकुलन क्षमता
hcp और ccp संरचनाओं में संकुलन क्षमता लगभग बराबर होती है।
मान लिया कि ccp संरचना के एकक कोष्ठिका के किनारे की लम्बाई तथा फलक विकर्ण AC = b है।
ABC में,
मान लिया कि यदि गोलो की त्रिज्या हो, तो
—–(i)
हम जानते हैं कि, त्रिज्या वाले गोले का आयतन
चूँकि ccp संरचना में प्रति एकक कोष्ठिका 4 गोले होते हैं।
अत: 4 गोले का कुल आयतन
हम जानते हैं कि किनारे वाले घन का आयतन
अत: समीकरण (i) से का मान रखने पर
एकक कोष्ठिका का कुल आयतन
अत: संकुलन क्षमता
अत: संकुलन क्षमता
अंत: केन्द्रित घनीय संरचनाओं में संकुलन क्षमता (Packing Efficiency in Body Centered Cubic (bcc) Structures)
मान लिया अंत: केन्द्रित घनीय संरचना चित्र में ली गई है।
अंत: केन्द्रित घनीय संरचना में केन्द्र में अवस्थित परमाणु विकर्ण पर व्यवस्थित अन्य दो परमाणुओं के संपर्क में है।
मान लिया कि घनीय एकक की एक भुजा है।
तथा में विकर्ण है। में विकर्ण है। अत: में
——– (ii)
अब, में,
[∵ समीकरण (ii) से]
———(iii)
अब मान लिया कि परमाणु की त्रिज्या
अब चूँकि काय विकर्ण (diagonal) की लंबाई एक पूरा गोला तथा दो आधा गोला के बराबर है।
अत: काय विकर्ण (diagonal) की लंबाई =
अत: समीकरण (iii) में का मान रखने पर हम पाते हैं कि
अब अंत: केन्द्रित घनीय (bcc) संरचना में परमाणुओं की कुल संख्या 2 है।
एक परमाणु (गोले) का आयतन
अत: दो गोले का आयतन
हम जानते हैं कि घन का आयतन
अत: अंत: केन्द्रित घनीय संरचना में संकुलन क्षमता
अत: अंत: केन्द्रित घनीय संरचना में संकुलन क्षमता
सरल घनीय जालक में संकुलन क्षमता (Packing Efficiency in Simple Cubic Lattice)
एक सरल घनीय जालक की एकक कोष्ठिका चित्र में ली गई है।
एक सरल घनीय जालक में केवल घन के कोनों पर परमाणु उपस्थित होते हैं।
मान लिया कि घन के एक भुजा की लम्बाई तथा प्रत्येक कण की त्रिज्या है।
चूँकि घन के किनारों पर कण एक दूसरे के संपर्क में होते हैं,
अत:
घनीय एकक कोष्ठिका का आयतन
चूँकि सरल घनीय एकक कोष्ठिका में केवल 1 परमाणु होता है। अत: परमाणु द्वारा भरे हुए स्थान का आयतन
अत: संकुलन क्षमता
अत:
(a) hcp और ccp संरचनाओं में संकुलन क्षमता (packing efficiency) = 74%
(b) अंत: केन्द्रित घनीय (bcc) संरचनाओं में संकुलन क्षमता (packing efficiency) = 68%
(c) तथा सरल घनीय जालक (simple cubic lattice) में संकुलन क्षमता (packing efficiency) = 52.4%
अर्थात hcp और ccp संरचनाओं में संकुलन क्षमता (packing efficiency) अधिकतम होती है।
एकक कोष्ठिका विमा संबंधी गणनाएं (Calculations involving Unit Cell Dimensions)
Unit cell के dimension की सहायता से यूनिट सेल का आयतन निकाला जा सकता है।
मान लिया कि Cubic crystal (घनीय क्रिस्टल) के Unit cell (एकक कोष्ठिका) के
कोर की लम्बाई
पदार्थ का घनत्व (Density) (पदार्थ तथा एकक कोष्ठिका का घनत्व बराबर होता है।)
तथा मोलर द्र्वयमान (Molar Mass) है।
अत: Cubic Crystal (घनीय क्रिस्टल) के
Unit cell (एकक कोष्ठिका) का आयतन
Unit cell (एकक कोष्ठिका) का द्र्व्यमान = एकक कोष्ठिका में परमाणु की संख्यां × एक परमाणु का द्रव्यमान
(जहाँ एकक कोष्ठिका में उपस्थित परमाणुओं की संख्या
तथा एक परमाणु का द्रव्यमान)
एकक कोष्ठिका में उपस्थित एक परमाणु का द्रव्यमान
(जहाँ मोलर द्र्व्यमान तथा एवोगाड्रो संख्या है।)
अत: एकक कोष्ठिका का घनत्व,
अत: उपरोक्त सूत्र के पाँच पैरामीटरों, d, z, M, a तथा NA, में से किसी चार के ज्ञात रहने पर पाँचवें की गणना उपरोक्त सूत्र से, की जा सकती है।