कंकाल तंत्र
कंकाल तंत्र गति , चलन , उठने , बैठने आदि में सहायक होने के साथ अन्य कार्य भी करता है । यह कैल्शियम एवं फॉस्फेट का संचित भण्डार है । कंकाल आंतरिक अंगों को सुरक्षा व आलम्बन प्रदान करता है
वयस्क मानव
कंकाल दो भागों में बांटा जा सकता है
1. अक्षीय कंकाल ( Axial Skeleton ) : यह शरीर की लम्ब अक्ष का कंकाल है । इसमें कुल 80 अस्थियाँ होती है । इसमें करोटि , कशेरूक दण्ड , उरोस्थि एवं पसलियाँ सम्मिलित होती है ।
A. करोटि ( Skull ) : मानव करोटि में 29 अस्थियाँ पाई जाती है । ये चार भागों में बँटी होती है
i. कपालीय अस्थियाँ ( Cranial bones ) – 8
ii. आननी अस्थियाँ ( Facial Bones ) – 14
iii. कंठिका अस्थियाँ ( Hyoid Bones ) – 1
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sp; iv. मध्य कर्ण अस्थियाँ ( मेलियस , इन्कस , स्टेपिस कुल 6 हड्डिया होती है तथा प्रत्येक मध्य कर्ण में तीन होती है )
B. कशेरूक दण्ड ( Vertebral Column ) : मनुष्य के कशेरूक दण्ड में कुल 33 कशेरूक होते है । कशेरूक दण्ड शरीर की मुख्य अक्ष बनाता है । कशेरूक परस्पर स्नायुओं ( Ligamants ) द्वारा जुड़े रहते हैं ।
C. पसलियाँ ( Ribs ) : मनुष्य में 12 जोड़ी पसलियाँ पाई जाती हैं । 8 , 9 व 10 वीं पसलियों को कूट पसलियाँ व अन्तिम दो पसलियाँ ( 11 वीं व 12 वीं ) मुक्त पसलियाँ ( Floating ribs ) कहलाती है ।
2. अनुबंधी कंकाल ( Appendicular Skeleton ) : मनुष्य में अंसमेखला एवं श्रोणि मेखला तथा अग्र व पश्च उपांगों की अस्थियाँ , अनुबंधी कंकाल बनाती है । मनुष्य में अनुबंधी कंकाल का निर्माण 126 अस्थियों से होता है ।
A. मेखलाएं ( Girdles ) : मेखलाएँ अक्षीय कंकाल व उपांगों के कंकाल के मध्य सम्बन्ध स्थापित करती है ।
ये दो प्रकार की होती है – अंस मेखला , श्रोणि मेखला ।
i. अंसमेखला अंसमेखला का प्रत्येक अध शि दो अस्थियों जंत्रुक ( Clavicle ) एवं अंस फलक ( Scapula ) से निर्मित होता है । Clavicle को कॉलर अस्थि ( Collar bone ) भी कहते हैं ।
ii. श्रोणि मेखला ( Pelvic Girdle ) : इसमें श्रोणि अस्थि ( Ilium ) , आसनस्थि ( Ischiun ) व जघनास्थि ( Pubic ) होती है ।
B. भुजाओं की अस्थियाँ ( Bones of Arms ) : मनुष्य की प्रत्येक भुजा में 30 अस्थियाँ होती है । ह्यूमरस – 1 , रेडियस- 1 , अल्ना -1 होती है । मनुष्य की कलाई में कार्पल की संख्या 8 होती है तथा मेटाकार्पल्स की संख्या 5 होती है । प्रत्येक भुजा का अंगुलीसूत्र 2 , 3,3 , 3 , 3 होता है । अंगूठे में 2 तथा प्रत्येक अंगुली में 3 3 अंगुलास्थियां ( Phalanges ) होती है ।
C. पैर की अस्थियाँ ( Bones of Legs ) – मनुष्य के
अस्थि अस्थियों के रोग
1. संधिशोध ( Arthritis ) : गठियाबाय ।
i. संधिवातीय संधिशोध ( Rheumatoid Arthritis ) : इस रोग में संधि झिल्ली में सूजन आ जाती है तथा झिल्ली की मोटाई बढ़ जाती है । संधि तरल का स्त्रवण बढ़ जाता है जिससे दाब बढ़ता है व झिल्ली मोटी हो जाती है ।
ii. ऑस्टियोआर्थाइटिस ( Osteo Arthritis ) : इस रोग में संधि क्षतिग्रस्त हो जाती है । यह वृद्धावस्था में होता है ।
iii. गठिया ( Gouty Arthritis ) : इस रोग में यूरिक अम्ल के मोनोसोडियम लवण संधियों में जमा हो जाने से यह रोग होता है
2. अस्थिछिद्रता ( Osteoporosis ) : इस रोग में कैल्शियम की कमी से अस्थि कमजोर हो जाती है व भंगुर हो जाती है जिससे हड्डी टूटने का खतरा बना रहता है । यह रोग अधिकतर महिलाओं में अधिक उम्र में होता है ।