ऊत्तक संरचना ( Tissue )
ऊत्तक संरचना
ऊतक शब्द एन ग्रे द्वारा बनाया गया था। इसे एक समूह के समान कोशिकाओं के रूप में परिभाषित किया गया है जो एक विशेष कार्य करने के लिए एक साथ गठित होते हैं, जैसे रक्त, फ्लोएम, मांसपेशियाॅ।
• खोज – बाइचेट
• हिस्टोलॉजी विज्ञान की वह शाखा जिसमें ऊत्तकों का अध्ययन किया जाता है ।
• Father of Histology बाइचेट
ऊतकों को मोटे तौर पर पौधे के ऊतकों और जानवरों के ऊतकों में वर्गीकृत किया जाता है। जीव विज्ञान की शाखा जो ऊतकों के अध्ययन से संबंधित है, ऊतक विज्ञान के रूप में जाना जाता है।
परिचय – कोशिकाओं का समूह है जिनकी उत्पत्ति ( origin ) , संरचना ( structure ) और कार्य ( work ) समान हो ।
उत्तक |
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जन्तु ऊत्तक |
पादप ऊत्तक |
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संयोजी ऊत्तक उपकला ऊत्तक पेशी उत्तक तंत्रिका उत्तक |
विभज्योत्तक (Meristematic Tissue) |
स्थायी ऊत्तक |
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सरल ऊत्तक मृदुत्तक स्थूलकोणोत्तक दृढोतक |
जटिल उत्तक जाइलम फ्लोएम |
A. जन्तुऊत्तक
a. संयोजीऊत्तक– संयोजन का कार्य करने वाले ऊत्तक
संयोजी ऊत्तक के प्रकार—
1. रुधिर( Blood )
2. अस्थि( Bone )
3. उपास्थिCartilage
4. एडिपोजउत्तक ।
( 1 ) रुधिर—
मात्रा– 5-6 लीटर ( 8 % of Body weight )
pH माप– 7.4 ( slighty alkyline ) हल्काक्षारीय
हिमेटोलॉजी– Study of blood
रुधिरतरल संयोजी ऊत्तक है
रुधिर का संगठन ( Blood Composition ) |
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ब्लड प्लाज्मा ( 55 % ) |
Carpcles रुधिर कणिकाएं ( 45 % ) |
90 % ( water ) Inorganic substance Na , K , Ca ( maximum ) organic substance A. Carbohydrate ( Sugar , glucose ) 65-110 mg / 100 ml . B. Lipid – cholestrol C. Protein |
RBC ( लाल रुधिर कणिका ) WBC – ( श्वेत रुधिर कणिकाएं ) Platlels ( बिम्बाणु )
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( i ) Albumin – परासरणदाब
( ii ) Globulin – एंटिबॉडीका निर्माण
( iii ) Fibronogen – रुधिरका थक्का ( Fiber protein- रेशेदार prolien )
रुधिर कणिकाएं |
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क्र . |
गुण |
RBC |
WBC |
Platelets |
1 . |
संख्या |
4.5-6 मिलियन / mm3 |
7000-11000 मिलियन / mm3 |
1.5-4.5 लाख / mm3 |
2 . |
निर्माण |
अस्थि मज्जा |
अस्थि मज्जा |
अस्थि मज्जा Bone marrow Bone marrow |
3 . |
केन्द्रक |
absent |
Present T1 Present |
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4 . |
वर्णक |
हिमोग्लोबिन ( Pigment ) |
* |
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5 . |
कार्य |
O2 का परिवहन |
प्रतिरक्षा तंत्र का रुधिर का विकास |
थक्का Immunity Blood Power Clotting |
6 . |
जीवन अवधि |
120 दिन |
2-4 दिन |
3-5 दिन |
b. संयोजीउत्तक–
अस्थि– शरीर का कठोर भागकंकाल तंत्र इनके द्वारा शरीर को निश्चित आकारप्रदान किया जाता है ।
• मानवशरीर में अस्थियों की संख्या – बाल्यावस्था-300 वयस्क 206
• मानवशरीर की सबसे बड़ीअस्थि – फिमर ( जांघ की हड्डी )
• मानवशरीर की सबसे छोटीअस्थि – स्टेपियस ( कान की हड्डी )
उपास्थि –लचीली अस्थि ईयर पिन्ना ( बाह्य कर्ण )
नाकका अग्र सिरा
श्वासनली में अर्द्धचंद्राकार छल्ले – हायलिन उपास्थि से बने होतेहैं– ( चमकदार उपास्थि होती है । )
कण्डरा ( Tendene ) |
स्नायु ( Ligments ) |
जोड़ों में उपस्थित । घुटने , कलाई आदि । |
कपाल व मेरुदण्ड में उपस्थित |
माँसपेशियों को हड्डियों से जोड़ना |
हड्डियों को हड्डियों से जोड़ना |
एडिपोज उत्तक
त्वचाके नीचे उपस्थित
वसाका संग्रहण
तापका नियमन
ज्ञानेन्द्रियोंको तंत्रिकाओं से जोड़ने काकाम ।
उपकला उत्तक( एपीयीलयम) –शरीर के बाहरी वआन्तरिक अंगों की सुरक्षात्मक परतजो घृणण के विरुद्ध सुरक्षाप्रधान करती है ।
उदाहरण
• हमारीमुखगुहा की आन्तरिक परत। –
• आहारनाल की आन्तरिक औरबाहरी परत ।
• आन्तरिकअंगों जैसे हृदय , फेफड़े , किडनी , लीवर आदि की बाहरी परत।
पेशी उत्तक( Misscles )
• मानवशरीर में मांसपेशियों की कुल संख्या-639
• माँसपेशियोंकी क्रियात्मक इकाई ( साकोमियर )
• शरीरकी सबसे मजबूत माँसपेशी – जबड़े की मांसपेशी
• शरीरकी सबसे मुलायम पेशी – गर्भाशय पेशी
कार्यके आधार के प्रकार –
• कार्यके आधार पर
• तीनप्रकार की होती है।
i. ऐच्छिक हमारी इच्छा अनुसार कार्य करने वाली माँसपेशी ।
उदाहरण– हाथ पेरों की माँसपेशी , गर्दनकी माँसपेशी कमर की माँसपेशी , जीभकी माँसपेशी , चेहरे की माँसपेशी ।ऐच्छिक माँसपेशियों में गहरे और हल्के Band पायेजाते हैं । अतः इसेरेखित पेशी भी कहते हैं।
ii. अनैच्छिक माँसपेशी– इनका कार्य करना हमारी इच्छा अनुसार नहीं होता है ।
उदाहरण– शरीर के आन्तरिक अंग– जैसे आहार नाल , किड़नी , फेफड़े , लीवर आदि । इन माँसपेशियोंमें गहरे और हल्के Band नहींपाये जाते हैं । अतः इन्हेंअरेखित पेशी भी कहते हैं।
Cardiac Muscles– मानवहृदय की पेशियाँ जीवनपर्यन्त क्रमबद्ध रूप से संकुचन करतीहै । हृदय पेशीरेखित प्रकार की होती है।
तंत्रिका ऊत्तक( Nurve )
तंत्रिकाकोशिका ( न्यूरॉन ) की संरचना
• न्यूरॉनहमारे शरीर की सबसे लम्बीकोशिका है ।
• प्रत्येकन्यूरॉन में दो प्रकार केतन्तु पाये जाते हैं ।
• द्रुमाश्म– ये शाखित , संख्या में अधिक और ज्ञानेन्द्रियों के संपर्कमें होते हैं ।
• एक्सोन— ये अशाखित संख्या में एक और न्यूरॉनके पीछे की ओर निकलताहै ।
• सिनेप्स— दो न्यूरॉन का संपर्क स्थलजहाँ एसीटाईल कोलीन हार्मोन के द्वारा एकन्यूरॉन से दूसरे न्यूरॉनमें आवेश प्रवाहित होता है ।
• निस्सलकण – निस्सल कण का पायाजाना न्यूरॉन की मुख्य विशेषताहै जो अन्य कोशिकामें नहीं पाये जाते ।
न्यूरॉन केप्रकार
( a ) उत्पत्तिके आधार पर
• कपालतंत्रिका – मस्तिष्क से उत्पन्न , संख्या-12 जोड़ी ।
• मेरूतंत्रिका मेरुरज्जु से उत्पन्न , संख्या-31 जोड़ी ( Spinal Nurve )
( b ) कार्यके आधार पर
• संवेदी( sensery ) – ज्ञानेन्द्रियाँ आवेग मस्तिष्क
• प्रेरक( motive ) – मस्तिष्कआवेग माँसपेशियों में
• मिश्रित( mixed ) – ज्ञानेन्द्रियाँआवेग मेरुरज्जूआवेग ‘
माँसपेशियोंमें नोट : हमारी मेरु तंत्रिकाएं मिश्रित प्रकार की होती हैं।
B. पादप ऊत्तक
1. विभज्योतक–
इसमें कोशिकाओं का समूह शामिल होता है जो सक्रिय रूप से अपने पूरे जीवन में विभाजित होते हैं।इस ऊत्तक की कोशिकाओं में लगातार विभाजन की क्षमता पाई जाती हैं ।
पादप के वृद्धिशील क्षेत्र – तने का शीर्ष वजड़ों का शीर्ष ( मूलाग्र) भाग में उपस्थित जिसके कारण तने की लम्बाई और जड़ों की लम्बाई में वृद्धि होती है । तने के केम्बियम में उपस्थित जिसके कारण मोटाई में वृद्धि होती है ।
2. स्थायी ऊत्तक –
विभज्योतक की कोशिकाओं मेंजब विभाजन की क्षमता खत्महो जाती है तो उसेस्थायी ऊत्तक कहा जाता है ।
स्थायी ऊत्तक के प्रकार—
• सरलउत्तक – एक ही प्रकारकी कोशिकाओं से निर्मित ,
• जटिलउत्तक – भिन्न प्रकार की कोशिकाओं सेनिर्मित
सरल उत्तक के प्रकार |
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( A ) मृदुनक ( पेरेन्काईमा ) |
( B ) स्थूल कोणोत्तक |
( C ) दृढोत्तक – |
पादप का भरण उत्तक – |
पादप की लचकमयी दृढ़ता – |
पादप की दृढता या कठोरता |
भोज्य पदार्थों का संग्रहण |
टहनियों का लचीलापन |
तनों व कठोर बीजों का आवरण |
पादप के सभी भागों में और प्रत्येक भाग की कोशिकाओं में |
शाकीय पादप ( फल , सब्जी ) के तनों का लचीलापन । |
मृत प्रकार की कोशिकाएं |
जीवित प्रकार की कोशिकाएं |
जीवित प्रकार की कोशिकाएं |
लिनिन , सुबेरिन का जमाव |
जटिल उत्तक के प्रकार |
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( A ) जायलम |
( B ) फ्लोएम वाहिका |
वाहिनिका , जाइलम रेशे व मृदुतक से निर्मित |
चालनीनलिका , सहकोशिका , फ्लोएम रेशे व फ्लोएम मृदुतक से निर्मित |
जड़ों से पत्तियों तक जल का संवहन |
पत्तियों से जड़ों तक खाद्य पदार्थ का संवहन |