आनुवांशिकी
आनुवांशिकी – विज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत आनुवांशिक लक्षणों की वंशागति का अध्ययन किया जाता है ।
आनुवांशिकी का जनक – ग्रेगर जॉन मेण्डल ।
आनुवांशिकी लक्षण – संतति को अपने जनक से प्राप्त लक्षण ।
आनुवांशिकी के पुनः खोजकर्ता
( i ) कॉल कोरेन्स
( ii ) इरिक वॉन शेरमर्क
( iii ) हुगो डी ब्रीज मेण्डल ने मटर ( पाइसम सेटाइवम ) पादप पर आनुवंशिक प्रयोग किए ।
मेण्डल के प्रयोग
1.
एक संकर क्रॉस ( Monohybrid Cross ) – जब सजीव के किसी एक लक्षण के युग्म विकल्पी ( एलिल ) के मध्य क्रॉस कराया जाए ।
जनक ( 2 n ) जनक ( 2 n ) 0 ( युग्मक ( n ) Egg Polen OF पीढ़ी Hybed O AO OF पीढ़ी
लक्षण प्ररूप = 33 : 1
जीन प्ररूप =1 : 2 : 1
एक संकर क्रॉस पर आधारित नियम
A. प्रभावित का नियम – जब दो शुद्ध जनको के मध्य क्रॉस कराते हैं तो F , पीढ़ी में जो लक्षण प्रकट होता हैं उसे प्रभावी और जो लक्षण प्रकट नहीं होता हैं उसे अप्रभावी लक्षण कहते हैं ।
B. युग्मको की शुद्धता का नियम – प्रत्येक युग्मक किसी लक्षण विशेष के लिए पूरी तरह शुद्ध होता है । इसे मेण्डल का सार्वत्रिक नियम ( Universal Law ) भी कहा जाता है ।
इसे जीन पृथक्करण का नियम भी कहते है ।
द्विसंकर क्रॉस ( Dhybrid Cross ) – जब जनक के दो लक्षणों के एलिल के मध्य क्रॉस कराया जाए ।
RrYy |
˟ |
RrYy |
|||||||
Round yellow |
Round yellow |
||||||||
RY |
Ry |
rY |
ry |
RY |
Ry |
rY |
ry |
||
|
RY |
Ry |
rY |
ry |
RY |
RRYY |
RRYy |
RrYY |
RrYy |
Ry |
RRYy |
RRyy |
RrYy |
Rryy |
rY |
RrYY |
RrYy |
rrYY |
rrYy |
ry |
RrYy |
Rryy |
rrYy |
rryy |
Punnet Square
9 = लंबे – लाल , 3 = लंबे – सफेद , 3 = बौने – लाल , 1 = बौने – सफेद
द्विसंकर क्रॉस पर आधारित नियम –
स्वतंत्र अपव्युहन नियम – इस नियमके अनुसार जीनो की वंशागति , स्वतंत्र रूप में होती है । और जीन स्वतंत्र रूप से संयोग करके नए लक्षण उत्पन्न करते है ।
प्रभावित नियम के अपवाद
1. अपूर्ण प्रभावित
A. ड्रोसोफिला मक्खी के आंखो का भूरा रंग ।
B. लाल और सफेद पुष्प वाले मटर के पादपों के मध्य क्रॉस करवाने पर कुछ पुष्पों का रंग गुलाबी होना ।
2. सह प्रभाविता
A. मवेशियों की त्वचा का रंग ।
B. मनुष्य में Blood Group की वंशागति
C. अप्रभावित – मनुष्य में Blood Group की वंशागति ।
स्वतंत्र अपव्यूहन नियम का अपवाद
· आनुवांशिक रोगो की वंशागति
मनुष्य में लिंग निर्धारण
मनुष्य में कुल गुणसूत्र = 46 , कायिक गुणसूत्र
= 44 ( नर व मादा में समान )
लिंग गुणसूत्र = 2 ( नर -XY , मादा – Xx )
नर 44 + XY मादा 44 + XX शुक्राणु 22 + x 22 + Y 22 + X 22 + x अण्डाणु 44 + XX पुत्री 44 + XX पुत्री 44 + XY पुत्र 44 + XY पुत्र
न्युक्लिक अम्ल :
· खोज फ्रेडरिक माईश्चर ने । ( मवाद कोशिका ( Puss Cell )
· केंद्रक में उपस्थित
· फॉस्फोरिक अम्ल की मात्रा अधिक ( More quantity of Phosphoricd Acid )
· प्रकार
i. DNA – Deoxy Ribose Nuclic Acid
ii. RNA- Ribose Nuclic Acid
न्युक्लिक अम्ल का रासायनिक संगठन ( Chemical Composition )
· शर्करा Deoxy Ribose ( DNA ) C5H10O4,
· Ribose ( RNA ) – C5H10O5
· फॉस्फोरिक अम्ल – H3PO4
· N क्षारक
i. प्यूरीन – एडिनीन ( A ) , ग्वानिन ( G )
ii. पिरिमिडिन – साइटोसिन ( C ) , थायमिन ( T ) , यूरेसिल ( U )
DNA अणु का निर्माण
शर्करा + फॉस्फोरिक एसिड + नाइट्रोजन
क्षारक |
|
प्युरीन = A,G |
पिरिमिडीन = C ,T |
.
DNA अणु का निर्माण निम्न चरणों में होता है
A. न्यूक्लिओसाइड – शर्करा + नाइट्रोजन , क्षारक शर्करा के प्रथम कार्बन पर N- क्षारक जुड़ता है । ( Oxygen ) N – base 4
B. न्युक्लिओटाइड
· DNA की संरचनात्मक इकाई ।
· न्युक्लिओसाइड + फॉस्फेट ( H , PO )
· फॉस्फेट समूह 3rdकार्बन पर N – base ®
C. पॉलि– न्युक्लिओटाइड – न्युक्लिओटाइड का आपस में जुड़ना ।
· एक न्युक्लिओटाइड दूसरे न्युक्लिओटाइड से फॉस्फेट समुह द्वारा जुड़ता है ।
· फॉस्फेट एक शर्करा के 3rd तथा दूसरी शर्करा के 5th कार्बन परमाणु के मध्य जुड़ता है ।
D. DNA अणु
i. DNA अणु में दो पॉलिन्युक्लिओटाइड श्रृंखला एक – दूसरे के प्रति समान्तर क्रम में स्थित होती है ।
ii. पॉलि – न्यूक्लिओटाइड श्रृंखला आपस में हाइड्रोजन बंध द्वारा जुड़ती हैं जो नाइट्रोजन क्षारक के बीच में बनती है प्यूरिन क्षारक पिरेमिडिन क्षारक से जुड़ता हैं जहाँ एडिनिन – थायमिन के बीच दो हाइड्रोजन बंध तथा साइटोसिन व ग्वानिन के बीच तीन हाइड्रोजन बंध बनती है ।
DNA अणु की मोटाई
· 20 Ao
· DNA अणु में दक्षिणावर्त कुण्डलन पाया जाता है
· DNA अणु के एक घुर्णन की लंबाई 34 A ° होती है ।
· एक घूर्णन में 10 पॉलि न्यूक्लीयोटाइड अणु होते है ।
· DNA अणु का आण्विक मॉडल वॉटसन व क्रिक द्वारा दिया गया ।
RNA ( राइबोस न्युक्लीक एसिड )
शर्करा – राइबोस
N- क्षारक –प्यूरीन = एडिनिन व ग्वानीन
पिरिमिडिन – थाइमिन व युरेसिल
A=T |
|
G = U |
Types of RNA
a. M – RNA : – द्रव्य RNA
निर्माण – DNA द्वारा
कार्य – प्रोटीन अणु निर्माण की सूचना कोशिका द्रव्य में लाना ।
b. t – RNA (स्थानांतरण RNA )
निर्माण – DNA द्वारा
कार्य – अमीनो अम्ल का राइबोसोम पर स्थानांतरण करना
c. r – RNA ( राइबोसोम – RNA )
निर्माण – केंद्रिका द्वारा
कार्य- अमीनो अम्ल को आपस में जोड़कर प्रोटीन अणु बनाना ( राइबोसोम पर )
प्रोटीन निर्माण का केंदिय सिद्धान्त – वाटसन व क्रीक द्वारा
DNA Tronscription m – RNA Translation प्रोटीन अणु
गुणसूत्र ( क्रोमोसोम ) –
खोज – वाल्डेयर
गुणसूत्र की आकारिकी का अध्ययन – मेटाफेज में ( मध्यावस्था )
रोग ( Disease ) ( Dis + ease = Uneasiness ) |
रोग ( Disease ) : वह अवस्था जो स्वस्थ व्यक्ति की शारीरिक क्रियाओं को प्रभावित करती है , तथा किसी अंग या तंत्र की कार्यक्षमता में कमी लाती है , रोग कहलाती है ।
शब्दावली |
|
प्रोफाईलोक्सिस |
रोगों से बचाव Prophyloxis कहलाता है । |
एपिडीमोलोजी |
रोग का कारण व प्रसार का अध्ययन ऐसे रसायन जो सूक्ष्म जीवों द्वारा स्त्रावित किये जाते है और अन्य सूक्ष्म जीवों की | एण्टीबायोटिक्स वृद्धि को रोकते है व उन्हें नष्ट करते हैं एंटीबायोटिक्स कहलाते हैं । उदाहरण – स्ट्रेप्टोमाइसिन , टेट्रासाइक्लिन |
एण्टीजन |
एण्टीबॉडी के उत्पादन को प्रेरित करने वाले रसायन Antigen कहलाते हैं । |
Analgesic |
दर्द या पीड़ा को नष्ट करने वाले रसायन उदाहरण – मोर्फिन , कोडिन |
Antipyretic |
ऐसे रसायन जो शरीर के ताप को कम या नियंत्रित करते हैं । उदाहरण – एस्प्रीन , रासिटामोल |
इन्टरफेरोन |
ये Antiviral Protein होते है जो वायरस संक्रमित कोशिका द्वारा स्त्रावित होते है तथा अपने आस पास की कोशिका को संक्रमण से बचाते हैं । |
रोग उत्पत्ति के आधार पर |
|
जन्मजात रोग ( उपापचयी अनियमितता के कारण ) |
अर्जित रोग( उपार्जित रोग ) ( ब्राह्य रोग कारकों के कारण ) |
|
|
उपार्जित रोग |
|
संक्रामक रोग ( संचरणीय ) ( तेजी से फैलते हैं ) |
असंक्रामक रोग ( असंचरणीय ) ( व्यक्ति विशेष तक सीमित ) |
जन्मजात रोग – होंठ का कटना , विदीर्ण तालु , मँगोलिज्म आदि ।
संक्रामक रोग –
I. बैक्टिरिया जनित – टायफाइड , तपेदिक , फ्लेग , हैजा , डिप्थिरिया आदि ।
II. वायरस जनित – एड्स , चेचक , पोलियो , हिपेटाइटिस , रेबीज , खसरा आदि ।
III. प्रोटोजोआ जनित पेचिस , मलेरिया , ऐस्केरिएसिस ( निमेटोड )
असंक्रामक रोग – डायबिटीज , कैन्सर , लकवा ( पक्षाघात ) , एलर्जी , मिर्गी आदि ।
आनुवांशिक रोग – वर्णान्धता , हीमोफीलिया , सिन्ड्रोम , गंजापन आदि ।
a. रोज जनक– रोग उत्पन्न करने वाले कारक ।
b. जैविक कारक – बैक्टिरिया , वायरस , प्रोटोजोआ ।
c. भौतिक कारक – U.V. Rays , α ,ᵦव : r – Rays , फिनॉल , मस्टर्ड गैस आदि ।
d. रोगवाहक – रोग का प्रसार करने वाले ।
उदाहरण : वायु , जल , दूषित , भोजन , मच्छर , मक्खी , जीन आदि ।
· बेक्टिरिया खोजकर्ता –ल्यूवेनहॉक
· वेक्सीनेशन –एडवर्ड जैनर
· क्लोरोफॉर्म- जेम्स सिम्पसन
· रेबीज वेक्सीन- लूई पॉश्चर
· कुष्ठ रोगाणु –हेनसन
· हैजा , तपेदिक जीवाणु –रॉबर्ट कोच
· पेनिसिलीन –एलेक्जेण्डर फ्लेमिंग
· D.D.T. – पॉल मूलर
· हाइड्रोफोबिया चिकित्सा –लुई पाश्चर
· एण्टिरेबीज टीका – लुई पाश्चर
· हार्ट – सर्जरी क्रिश्चियन बर्नार्ड
· एन्टि सेप्टिक सर्जरी – लिस्टर
· B.C.G. टीका – यूरिन कालमेट
· हाइपरटेन्शन -High blood pressure
· ल्यूकेमिया- ब्लड कैंसर
· केट्रेक्ट- लैंस का अपारदर्शी होना ।
हीनता जन्य रोग- पोषक तत्वों की कमी से होने वाले रोग ।
विटामिन की कमी से – प्रोटीन की कमी से होने वाले रोग ।
· विटामिनA- रेटिनोल – रतौंधी – गाजर , मछली यकृत तेल , हरी सब्जियाँ
· विटामिन B1– थायमिन— बेरी – बेरी – साबुत अन्न , समुद्री भोजन , सब्जियाँ
· विटामिनB2 , – राइबोफ्लेविन– शरीर के भार मेंकमी , रूखापन – दूध , मटर , सेम , यीस्ट , केला
· विटामिनB3 , – नियासिन– पेलाग्रा – अंकुरित अनाज , टमाटर , माँस
· विटामिन B6 – पायरीडॉक्सिन– असामान्य प्रोटीन उपापचय – हरी सब्जियाँ , यकृत , केला
· विटामिनB12 , – साएनोकोबालामिन– एनीमिया यकृत , दूध
· विटामिन C – एस्कार्बिकएसिड – स्कर्वी – खट्टे फल
· विटामिन D- केल्सीफिरॉल– रिकेट्स , ऑस्टियोमलेशिया – दूध , घी , सूर्य का प्रकाश
· विटामिनE- टोकोफेरॉल – प्रजनन क्षमता में कमी अंकुरित अनाज , सब्जियाँ
· विटामिनK- फिलोक्विलोन – रक्त का थक्का नहींहरी सब्जियाँ , टमाटर , पनीर
· विटामिनB9 , – फोलिकएसिड – भ्रुणावस्था कि न्युरल
· डिफेक्ट– हरी सब्जियाँ , पास्ता , लिवर
· पोटेशियम– पेशीय संकुचन व तंत्रिका आवेगसंचरण ।
· केल्शियम– हड्डियों व दांतों कोदृढ़ता प्रदान करता है . रुधिर स्कन्दन – टिटेनी , रिकेटस
· आयरन– RBC में हिमोग्लोबिन बनाने में ।
· आयोडीन–थायरॉक्सिन हार्मोन के संश्लेषण में, माँस , बनता – गलगण्ड रोग ।