आजाद हिंद फौज

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 आजाद हिंद फौज की स्थापना 1 सितंबर 1942 ईस्वी को रासबिहारी बोस के द्वारा की गई थी

स्थापना सिंगापुर

जिसका मुख्य सेनापति कैप्टन मोहन सिंह थे।

सुभाष चंद्र बोस आजाद हिंद फौज से 4 जुलाई 1943 ईस्वी को जुड़े थे

जापान के द्वारा 8 नवंबर 1943 ईस्वी को भारत के अंडमान और निकोबार दीप समूह पर कब्जा कर लिया गया था यह दोनों दीप आजाद हिंद फौज को दे दिए।

सुभाष चंद्र के द्वारा इन दीपों का नाम परिवर्तित कर अन्य मार्ग को सही दीप तथा निकोबार को स्वराजदीप की संज्ञा दी थी

सुभाष चंद्र बोस द्वारा सिंगापुर में ही 21 अक्टूबर 1943 भारत के लिए अस्थाई सरकार का गठन किया गया

परंतु फार्मूला दीप समूह के मेंएक वायुयान दुर्घटना में 18 अगस्त 1945 ईस्वी को सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु हो गई।

परंतु इस दुर्घटना के पूर्व सुभाष चंद्र बोस ने भारतीय जनता को संबोधित किया था तथा गांधी जी से आशीर्वाद प्राप्त हेतु उन्हें राष्ट्रपिता कह कर पुकारा था

महत्वपूर्ण तथ्य

ब्रिटिश सरकार के द्वारा फरवरी 1946 ईस्वी पैथिक लोरेंस की अध्यक्षता में कैबिनेट मिशन भारत भेजने की घोषणा की गई थी

जिस का भारत आगमन 24 मार्च 1946 ईस्वी को हुआ था

इस मिशन में कुल सदस्यों की संख्या 3 थी

  1. पैथीन लॉरेंस अध्यक्ष
  2. स्टेशन क्लिप्स भारत सचिव
  3. ए वी अलेक्जेंडर नौसेना अध्यक्ष
मुस्लिम लिग के द्वारा 14 अगस्त 1946 ईस्वी को कोलकाता में प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस मनाया गया
ब्रिटिश सरकार के द्वारा पंडित जवाहरलाल नेहरू को सरकार के गठन के लिए निमंत्रण प्राप्त किया गया था
2 सितंबर 1946 ईस्वी को पंडित नेहरू के द्वारा स्थाई सरकार का गठन किया गया था
प्रारंभ में इस सरकार में सम्मिलित नहीं हुई थे परंतु 25 अक्टूबर 1946 ईस्वी को अंतिम सरकार में सम्मिलित हुए
20 फरवरी 1947 ईस्वी को ब्रिटिश प्रधानमंत्री cr8 ली ने ब्रिटिश संसद के हाउस ऑफ कॉमन में बताया कि भारत को जून 1948 ईस्वी तक स्वतंत्रता प्रदान कर दी जाएगी इसी भारतीय स्वतंत्रता की घोषणा कहते हैं
लार्ड माउंट बेटन के दो 3 जून 1947 ईस्वी को वीटी संसद में भारत विभाजन की रूपरेखा प्रस्तुत की गई थी इसे ही माउंट बेटन योजना की थी
18 जुलाई 1947 ईस्वी को ब्रिटिश संसद के द्वारा भारत स्वतंत्र अधिनियम पारित किया गया जिससे भारत में 15 अगस्त 1947 ईस्वी को लागू किया गया था
मौलाना अब्दुल कलाम आजाद इंडिया विंस फ्रीडम
भारत का विभाजन अनिवार्य नहीं था इसे टाला जा सकता था

Er. Dinesh

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