अकबर

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हमीदा बेगम की गर्भ से वीर साला के महल में 15 अक्टूबर 1542 ईसवी को अकबर का जन्म हुआ था जो कि हुमायूं की मृत्यु के बाद भारत का शासक बना

अकबर के बचपन का नाम बदरुद्दीन था 
जिसके द्वारा सुलह  कुल की नीति का पालन किया था
अकबर के संपूर्ण जीवन काल को तीन भागों में विभाजित किया जाता है

1556 ई से 1575 ई तक 
 
पानीपत का द्वितीय युद्ध
यही युद्ध अकबर के संरक्षण बैरम खां पर हुमू के मध्य लड़ा गया था जिसमें हुमू पराजित हुआ था
हम के द्वारा विक्रमादित्य की उपाधि धारण की गई थी
अकबर के  प्रमुख सुधार
1562 ईसवी हिंद युद्ध बंदियों के धर्म परिवर्तन  पर रोक
 1563 ईस्वी तीर्थ यात्रा कर पर रोक
1564 ईस्वी जजिया कर समाप्त
 उच्च पदों पर हिंदुओं की नियुक्ति
 टोडरमल दीवान विन्त विभाग उपाधि राजा
 रायसिंह जोधपुर का गवर्नर 
भगवंत दास पंजाब का गवर्नर 
अमीरहुर उमरा की उपाधि
काबुल बिहार पंजाब 5000 के मनसन प्रदान की जो मुगल काल में दी जाने वाली सर्वाधिक  मनसन थी
 जीवन का दूसरा चरण
 1575 से 1582
 इबादत खाने की स्थापना 1575 ईसवी में फतेहपुर सीकरी में की गई थी जिसका प्रमुख उद्देश्य विभिन्न धर्म की जानकारी प्रदान करता था
 हिंदू , फारसी  , मुस्लिम,  जैन
अकबर सबसे ज्यादा प्रभावित जैन धर्म से हुआ था जिसके कारण अकबर ने मांस खाना बंद कर दिया था
महजर जी की घोषणा
1579 घोषणा का प्रारूप तैयार शेर का मुबारक नागेरी वर्णन मुस्लिम नियम की अंतिम व्याख्या का अधिकार सम्राट को प्रदान
 साम्राज्य विस्तार
बिना प्रतिरोध के अकबर की अधीनता स्वीकार
आमेर 1562 भारमल अपनी पुत्री हर का भाई का विवाह अकबर के साथ किया था इसे जहांगीर का जन्म हुआ था
 बीकानेर कल्याणमल 1570
 जैसलमेर 1570  हरराय भाटी
प्रारंभिक प्रतिरोध के बाद अकबर की अधीनता स्वीकार
 रणथंबोर 1569   राजा सुर्जन राव हाडा

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