दुर्गो के प्रकार :-
कौटिल्य के मतानुसार दुर्गो को चार कोटियों में बाँट गया है ,
1. औदक दुर्ग ( जल दुर्ग
2. पार्वत दुर्ग ( पर्वत दुर्ग ) या गिरि दुर्ग
3. धान्वन दुर्ग ( मरूस्थल दुर्ग )
4. वन या आरण्य दुर्ग
शुक्र नीति के अनुसार दुर्गा के नौ भेद बताए है
1. औरण दुर्ग – खाई , काँटो या पत्थरों से जिसके मार्ग दुर्गम हो ex:-रणथम्भौर का दुर्ग ।
2. पारिख दुर्ग – यह दुर्ग जिसके चारों तरफ बहुत बड़ी खाई हो । बीकानेर का जूनागढ दुर्ग , लोहागढ ( भरतपुर )
3. पारिध दुर्ग वह दुर्ग जिसके चारो तरफ ईंट , पत्थर तथा मिट्टी से बनी बड़ी – बड़ी दीवारों का परकोटा हो । चित्तौडगढ , कुम्भलगढ दुर्ग ।
4. औदक दुर्ग या जल दुर्ग – वह दुर्ग जिसके चारो ओर जल राशि हो । – गागरोन का दुर्ग , शेरगढ़ दुर्ग ( बारा ) , भैसरोडगढ दुर्ग ।
5. वन दुर्ग या अरण्य दुर्ग – वह दुर्ग जो चारो ओर बडे बडे कांटेदार वृक्षों के समूह से घिरा हुआ हों । सिवाणा दुर्ग , रणथम्भौर दुर्ग इसी कोटि के है ।
6. धान्वन दुर्ग – वह दुर्ग जिसके चारो तरफ दूर – दूर मरूभूमि फैली हो । जैसलमेर दुर्ग , बीकानेर दुर्ग भटनेर , नागौर दुर्ग , चूरू का किला , बाडमेर का किला ।
7. गिरि दुर्ग या पार्वत दुर्ग – एकान्त में किसी दूर्गम पहाडी पर स्थित दूर्ग जिसमें जल संचय का उचित प्रबन्ध हो गिरि दुर्ग की कोटि में आते है । राजस्थान में अधिकांशः प्रमुख दुर्ग इसी कोटि में आते है । चित्तौडगढ , रणथम्भौर , जालौर , अजमेर का तारागढ , जोधपुर का मेहरानगढ , आमेर का जयगढ दुर्ग सिवाना दुर्ग , कुम्भलगढ , नाहरगढ दुर्ग , अचलगढ , बयाना दुर्ग , टॉडगढ़ ,बूंदी दुर्ग
8. सहाय दुर्ग – वह दुर्ग जिसमें शूरवीर वह सैनिकों के साथ साथ अनुकूल रहने वाले बांधव लोग रहते हो चित्तौड़गढ़ ,जालौर, सिवाना दुर्ग।
9. सैन्य दुर्ग – वह दुर्ग जो व्यूह रचना में चतुर सैनिकों के साथ अभेद्य हो
उपयुक्त सभी दुर्गों के प्रकार में सैनिक दुर्ग को सर्वश्रेष्ठ माना गया है